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प्रमुख पार्टी सीएचपी कार्यालय पहुंची पुलिस

चुनाव के पहले ही एर्देगॉन पर लगा दमन का आरोप

एजेंसियां

अंकाराः तुर्किए की पुलिस ने रविवार को देश की मुख्य विपक्षी पार्टी सीएचपी के कार्यालयों पर धावा बोल दिया और गेट के बाहर एकत्र हुए पार्टी समर्थकों व अधिकारियों की भीड़ पर आंसू गैस के गोले छोड़े तथा रबर की गोलियां चलाईं। यह रिपब्लिकन पीपल्स पार्टी (सीएचपी) के सदस्यों और अदालत द्वारा नियुक्त इसके नए नेतृत्व के बीच कई घंटों से चले आ रहे गतिरोध का एक हिंसक अंत था। राजधानी अंकारा में स्थित इस इमारत और उसके आसपास के स्थानीय मीडिया के फुटेज में आंसू गैस के विशाल बादल और दंगारोधी पुलिस को परिसर के भीतर घुसते हुए देखा जा सकता है।

तनाव गुरुवार से ही बढ़ रहा था, जब एक अपील अदालत ने नवंबर 2023 में पार्टी अध्यक्ष के रूप में ओज़गुर ओज़ेल के चुनाव को रद्द कर दिया था। अदालत के फैसले में कहा गया कि उनकी जगह उनके पूर्ववर्ती केमल किलिकदारोग्लू को नियुक्त किया जाना चाहिए, जिन्होंने 13 वर्षों तक पार्टी का नेतृत्व किया था, लेकिन वे कभी कोई राष्ट्रीय चुनाव नहीं जीत पाए।

दूसरी ओर, ओज़ेल ने पार्टी नेता के रूप में अपने पहले और एकमात्र चुनाव में, 2024 के स्थानीय निकाय चुनावों में राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन की सत्तारूढ़ जस्टिस एंड डेवलपमेंट पार्टी को करारी शिकस्त दी थी। विपक्ष का कहना है कि यह फैसला राजनीतिक रूप से प्रेरित है ताकि पार्टी को कमजोर किया जा सके, जो अपने सदस्यों और निर्वाचित अधिकारियों को निशाना बनाने वाले कानूनी मुकदमों की लहरों से जूझ रही है। अगला राष्ट्रपति चुनाव 2028 में होना है, लेकिन एर्दोगन समय से पहले चुनाव बुला सकते हैं। उनके मुख्य प्रतिद्वंद्वी, इस्तांबुल के मेयर और सीएचपी सदस्य एकरेम इमामोग्लू पिछले साल मार्च से जेल में हैं और उन पर भ्रष्टाचार के आरोपों में मुकदमा चलाया जाना है।

कई विश्लेषकों का कहना है कि सीएचपी के खिलाफ कानूनी मामले—जो ज्यादातर भ्रष्टाचार के आरोपों पर केंद्रित हैं—अगले चुनाव से पहले पार्टी को निष्क्रिय करने के उद्देश्य से हैं। हालांकि, सरकार का दावा है कि तुर्किए की अदालतें निष्पक्ष हैं और राजनीतिक दबाव से स्वतंत्र होकर काम करती हैं।

फिलहाल पार्टी का एक बड़ा हिस्सा ओज़ेल के साथ खड़ा है। गुरुवार के अदालती फैसले के बाद से वे और पार्टी के अधिकांश नेता राजधानी अंकारा में सीएचपी मुख्यालय के भीतर डटे हुए थे, जिससे नया प्रशासन अंदर प्रवेश नहीं कर पा रहा था। इस गतिरोध से बाहर निकलने का रास्ता खोजने के लिए दोनों विरोधी पक्षों को रविवार दोपहर को मिलना था।

स्थानीय मीडिया ने बताया कि कार्यालय के बाहर एक भीड़ जमा हो गई थी, जिसके बारे में ओज़ेल ने दावा किया कि वे सीएचपी के सदस्य नहीं थे बल्कि उन्हें डराने-धमकाने के लिए भेजा गया था। इसके बाद किलिकदारोग्लू के वकील ने अंकारा पुलिस से इमारत खाली कराने में मदद का अनुरोध किया, जिसे अंकारा गवर्नर कार्यालय ने मंजूरी दे दी।