एएनटी 2 प्रोटिन पर रोक से बढ़ती है प्रतिरोधक क्षमता
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टी कोशिकाएं ही असली योद्धा है
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आनुवंशिक बदलाव से दवाओं तक
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इसके आगे क्लीनिकल ट्रायल शेष है
राष्ट्रीय खबर
रांचीः कैंसर के उपचार की दिशा में वैज्ञानिकों ने एक क्रांतिकारी सफलता हासिल की है, जिसमें शरीर की अपनी रक्षा प्रणाली यानी इम्यून सिस्टम को पहले से कहीं अधिक घातक और प्रभावी बनाने का तरीका खोजा गया है। हिब्रू यूनिवर्सिटी के फैकल्टी ऑफ मेडिसिन के शोधकर्ताओं के नेतृत्व में किए गए एक अंतरराष्ट्रीय अध्ययन ने यह सिद्ध किया है कि एएनटी 2 नामक एक विशिष्ट प्रोटीन को अवरुद्ध करके, टी-कोशिकाओं की कैंसर से लड़ने की क्षमता को कई गुना बढ़ाया जा सकता है।
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टी-कोशिकाएं हमारे प्रतिरोधी तंत्र की मुख्य योद्धा होती हैं। नेचर कम्युनिकेशंस में प्रकाशित इस शोध के अनुसार, वैज्ञानिकों ने इन कोशिकाओं के भीतर ऊर्जा उत्पादन की प्रक्रिया, जिसे मेटाबॉलिज्म कहा जाता है, में बदलाव करने में सफलता पाई है। जब एएनटी 2 प्रोटीन को निष्क्रिय किया गया, तो टी-कोशिकाओं के भीतर मौजूद माइटोकॉन्ड्रिया (कोशिका का पावरहाउस) ने अपनी कार्यप्रणाली बदल दी। इस आंतरिक बदलाव ने कोशिकाओं की पावर सप्लाई को पुनर्गठित कर दिया, जिससे वे सामान्य से अधिक सक्रिय, टिकाऊ और आक्रामक हो गईं।
इस महत्वपूर्ण अध्ययन का नेतृत्व पीएचडी छात्र ओमरी योसेफ और प्रोफेसर माइकल बर्गर ने किया। इसमें फिलिप्स यूनिवर्सिटी ऑफ मारबर्ग की प्रोफेसर मैग्डालेना ह्यूबर और यूनिवर्सिटी ऑफ टैक्सस एमडी एंडरसन कैंसर सेंटर के प्रोफेसर इयाल गोटलिब ने भी सहयोग दिया। टीम ने पाया कि जब टी-कोशिकाओं को अपने ऊर्जा रूपांतरण के तरीके को बदलने के लिए मजबूर किया जाता है, तो वे कैंसर कोशिकाओं को पहचानने और उन्हें नष्ट करने में कहीं अधिक सटीक हो जाती हैं।
प्रोफेसर बर्गर के अनुसार, एएनटी 2 को अक्षम करके हमने टी-कोशिकाओं के चयापचय में पूर्ण बदलाव किया है, जिससे वे कैंसर के विरुद्ध अधिक फुर्तीले और शक्तिशाली लड़ाके बन गए हैं।
इस शोध की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि टी-कोशिकाओं में यह मेटाबॉलिक बदलाव न केवल जेनेटिक इंजीनियरिंग के माध्यम से, बल्कि दवाओं के जरिए भी लाया जा सकता है। इसका अर्थ है कि भविष्य में ऐसी दवाएं विकसित की जा सकती हैं जो रोगी के शरीर में सीधे प्रवेश कर उसके प्रतिरोधी तंत्र को अपग्रेड कर सकें।
यह खोज कैंसर इम्यूनोथेरेपी के एक नए युग की शुरुआत है। अब तक का ध्यान केवल इम्यून सिस्टम को निर्देशित करने पर था, लेकिन यह अध्ययन कोशिका के बुनियादी स्तर पर उसके कार्य करने की क्षमता को बढ़ाने पर केंद्रित है। हालांकि अभी नैदानिक परीक्षण शेष हैं, लेकिन यह खोज प्राकृतिक और सटीक कैंसर उपचार की दिशा में एक बड़ी उम्मीद जगाती है।
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