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हिमालयी पारिस्थितिकी पर संकट अत्यधिक

घटते वन क्षेत्र की वजह से पहाड़ नहीं मैदानों पर भी संकट बढ़ा

  • अत्यंत सुक्ष्म स्तर पर हो रहा है बदलाव

  • वन्यजीव-मानव संघर्ष तेजी से बढ़ रहे हैं

  • भूस्खलन और अचानक बाढ़ का असर

राष्ट्रीय खबर

रांचीः हिमालय, जिसे दुनिया की छत और भारत का पारिवारिक रक्षक माना जाता है, वर्तमान में एक गंभीर पर्यावरणीय संकट से गुजर रहा है। मार्च 2026 की हालिया सांख्यिकीय रिपोर्टों और संसदीय चर्चाओं के अनुसार, भारतीय हिमालयी क्षेत्र में वन आच्छादन में चिंताजनक गिरावट दर्ज की गई है। आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि वर्ष 2021 से 2023 के बीच के संक्षिप्त अंतराल में ही लगभग 350 वर्ग किलोमीटर से अधिक का सघन वन क्षेत्र नष्ट हो गया है। यह गिरावट न केवल जैव विविधता के लिए खतरा है, बल्कि इस संवेदनशील क्षेत्र की भूगर्भीय स्थिरता को भी कमजोर कर रही है।

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वन क्षेत्र में इस कमी का सबसे बड़ा कारण अनियंत्रित शहरीकरण और बुनियादी ढांचे का विस्तार है। चारधाम परियोजना, सीमावर्ती सड़कों का चौड़ीकरण और जलविद्युत परियोजनाओं के निर्माण के कारण हजारों पेड़ों की कटाई की गई है। इसके अतिरिक्त, जलवायु परिवर्तन के कारण बढ़ती दावानल की घटनाओं ने भी वनों को अपूरणीय क्षति पहुँचाई है। जब ऊँचे पर्वतीय क्षेत्रों से वन कम होते हैं, तो मिट्टी की पकड़ ढीली हो जाती है, जिससे भूस्खलन और अचानक आने वाली बाढ़ की आवृत्ति बढ़ जाती है।

वनों के विखंडन का सीधा असर वहां के वन्यजीवों पर पड़ा है। विशेष रूप से हाथियों और तेंदुओं के प्राकृतिक गलियारे बाधित हुए हैं। रेलवे पटरियों और राजमार्गों के वनों के बीच से गुजरने के कारण ट्रेन-वन्यजीव टकराव की घटनाओं में वृद्धि हुई है। इसे देखते हुए, केंद्र सरकार ने मार्च 2026 में नई कठोर गाइडलाइन्स जारी की हैं। इन नियमों के तहत अब हिमालयी क्षेत्रों में बनने वाले किसी भी नए रैखिक बुनियादी ढांचे के लिए इको-ब्रिज और अंडरपास बनाना अनिवार्य कर दिया गया है।

हिमालयी वनों का संरक्षण केवल क्षेत्रीय मुद्दा नहीं है, क्योंकि यह उत्तर भारत की नदियों के जल स्तर और मानसून चक्र को भी नियंत्रित करता है। वैज्ञानिकों का मानना है कि यदि वन कटाई की यही दर जारी रही, तो आने वाले दशक में हिमालयी क्षेत्र के सूक्ष्म-जलवायु में स्थायी बदलाव आ सकता है। अतः, सतत विकास के साथ-साथ पुनर्वनीकरण की आक्रामक नीतियों की तत्काल आवश्यकता है।

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