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नमक के दाने से भी छोटा इम्प्लांट तैयार

अब दिमाग की गतिविधियों को पढ़ना भी संभव होगा

  • सुक्ष्म इलेक्ट्रॉनिक्स का नया कमाल

  • दिमागी तरंगों को रिकार्ड करता है यह

  • भविष्य के ईलाज में होगा मददगार

राष्ट्रीय खबर

रांचीः विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में सूक्ष्म इलेक्ट्रॉनिक्स ने एक ऐसी सफलता हासिल की है जो भविष्य में चिकित्सा विज्ञान की दिशा बदल सकती है। कॉर्नेल विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने एक अत्यंत छोटा न्यूरल इम्प्लांट विकसित किया है, जिसका आकार नमक के एक दाने से भी कम है।

अपनी सूक्ष्म संरचना के बावजूद, यह उपकरण किसी जीवित जीव के मस्तिष्क की गतिविधियों का डेटा वायरलेस तरीके से एक वर्ष से अधिक समय तक प्रसारित करने में सक्षम है। इस क्रांतिकारी उपकरण को माइक्रोस्केल ऑप्टोइलेक्ट्रॉनिक टेदरलेस इलेक्ट्रोड या एमओटीई नाम दिया गया है। इसका विकास कॉर्नेल विश्वविद्यालय के प्रोफेसर अलेयोशा मोलनार और नानयांग टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी के सहायक प्रोफेसर सुनवू ली के नेतृत्व में किया गया है।

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यह डिवाइस लगभग 300 माइक्रोन लंबी और 70 माइक्रोन चौड़ी है। इसकी कार्यप्रणाली प्रकाश की किरणों पर आधारित है। यह इम्प्लांट लाल और इन्फ्रारेड लेजर बीम का उपयोग करता है, जो मस्तिष्क के ऊतकों को नुकसान पहुँचाए बिना उनसे गुजर सकती हैं। डेटा ट्रांसमिशन के लिए, यह इन्फ्रारेड प्रकाश की सूक्ष्म तरंगें उत्सर्जित करता है, जिनमें मस्तिष्क के विद्युत संकेतों को एनकोड किया जाता है।

एमओटीई के केंद्र में एल्युमिनियम गैलियम आर्सेनाइड से बना एक सेमीकंडक्टर डायोड है। यह घटक दोहरी भूमिका निभाता है:

यह बाहर से आने वाले प्रकाश को कैप्चर कर सिस्टम को बिजली प्रदान करता है। यह डेटा प्रसारित करने के लिए स्वयं प्रकाश उत्सर्जित करता है।

इसमें एक लो-नॉइज़ एम्पलीफायर और एक ऑप्टिकल एनकोडर भी शामिल है, जो उसी तकनीक पर आधारित हैं जिसका उपयोग हमारे दैनिक जीवन के माइक्रोचिप्स में होता है। शोधकर्ताओं ने इसमें पल्स पोजीशन मॉड्यूलेशन कोड का उपयोग किया है—वही तकनीक जो उपग्रहों के ऑप्टिकल संचार में उपयोग की जाती है। इससे बहुत कम ऊर्जा की खपत में सटीक डेटा प्राप्त करना संभव हो जाता है।

प्रोफेसर मोलनार के अनुसार, यह अब तक का सबसे छोटा वायरलेस न्यूरल इम्प्लांट है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें उपयोग की गई सामग्री एमआरआई स्कैन के दौरान भी मस्तिष्क की गतिविधियों को रिकॉर्ड करने की अनुमति दे सकती है, जो वर्तमान के बड़े इम्प्लांट्स के साथ संभव नहीं है।

भविष्य में, इस तकनीक का विस्तार शरीर के अन्य हिस्सों, जैसे कि रीढ़ की हड्डी की निगरानी के लिए भी किया जा सकता है। इसे कृत्रिम खोपड़ी की प्लेटों में एम्बेड करके दीर्घकालिक न्यूरोलॉजिकल निगरानी के लिए उपयोग में लाया जा सकता है।

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