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दरगाह आला हजरत उर्स-ए-रजवी में मिसाल: सावन के सम्मान में नहीं बनेगी नॉनवेज बिरयानी, परोसा जाएगा शाकाहारी लंगर

बरेली (उत्तर प्रदेश): सुन्नी-बरेलवी मुसलमानों के विश्वविख्यात धार्मिक केंद्र ‘दरगाह आला हजरत’ से इस वर्ष सामाजिक सौहार्द और पारस्परिक भाईचारे की एक अत्यंत प्रेरक मिसाल सामने आई है।

108वें उर्स-ए-रजवी के गरिमामयी आयोजन के दौरान लगने वाले विभिन्न लंगरों में इस बार मांसाहारी भोजन नहीं पकाया जाएगा। दरगाह प्रमुख मौलाना सुब्हान रजा खान (सुब्हानी मियां) ने समस्त लंगर आयोजकों एवं कमेटियों से पुरजोर अपील की है कि वे श्रद्धालुओं व जायरीनों को केवल सात्विक और पूर्णतः शाकाहारी भोजन ही परोसें। उन्होंने कहा कि वर्तमान में हिंदू समुदाय का अत्यंत पवित्र सावन मास चल रहा है और संपूर्ण बरेली शहर में शिवभक्ति का वातावरण है; अतः ऐसे समय में प्रत्येक नागरिक की धार्मिक भावनाओं का आदर करना हमारा नैतिक दायित्व है।

🍲 बिरयानी के स्थान पर बनेगी पूरी-सब्जी, दाल-चावल व हलवा, कायम होगी गंगा-जमुनी तहजीब

दरगाह प्रबंधन का स्पष्ट मानना है कि उर्स का मूल ध्येय प्रेम, इंसानियत और पारस्परिक सौहार्द का प्रसार करना है।

अतः इस बार उर्स के लंगरों में पारंपरिक बिरयानी अथवा किसी भी प्रकार के मांसाहारी व्यंजनों के स्थान पर पूरी, सब्जी, दाल, चावल, खिचड़ी, हलवा और अन्य विशुद्ध शाकाहारी पकवान ही तैयार किए जाएंगे। धार्मिक एवं सामाजिक हल्कों में दरगाह प्रबंधन के इस ऐतिहासिक फैसले को बरेली की पौराणिक ‘गंगा-जमुनी तहजीब’ के उत्कृष्ट उदाहरण के रूप में सराहा जा रहा है।

🗓️ सावन के अंतिम सोमवार को देखते हुए बदला उर्स का कार्यक्रम, 6 अगस्त से होगी ‘परचम कुशाई’

सावन मास के मुख्य स्नान और श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के दृष्टिगत उर्स-ए-रजवी की तिथियों एवं कार्यक्रमों में भी आंशिक संशोधन किया गया है।

आगामी 6 अगस्त 2026 को परंपरागत ‘परचम कुशाई’ (ध्वजारोहण) की रस्म के साथ 108वें उर्स का औपचारिक शुभारंभ होगा। पूर्व में ‘कुल शरीफ’ की मुख्य रस्म 9 अगस्त को प्रस्तावित थी, परंतु सावन के अंतिम सोमवार की धार्मिक संवेदनशीलता और कांवड़ियों की सुगम आवाजाही को देखते हुए कार्यक्रम की समय-सारणी में परिवर्तन किया गया है। दरगाह प्रबंधन के अनुसार, इस निर्णय का मुख्य उद्देश्य शहर में शांति, सुरक्षा और सौहार्दपूर्ण वातावरण बनाए रखना है।

📢 “हर वर्ग बिना संकोच लंगर में हो सके शामिल”, इंतजामिया कमेटी ने दिए सख्त निर्देश

दरगाह की इंतजामिया कमेटी के वरिष्ठ पदाधिकारी नासिर कुरैशी ने जानकारी देते हुए बताया कि दरगाह प्रमुख ने शहर की समस्त लंगर कमेटियों को स्पष्ट दिशा-निर्देश निर्गत किए हैं।

निर्देश में कहा गया है कि शहर में कहीं भी मांसाहारी लंगर का आयोजन न किया जाए और केवल शुद्ध शाकाहारी भोजन ही वितरित किया जाए, ताकि हर धर्म, संप्रदाय और वर्ग के लोग बिना किसी हिचकिचाहट के इस लंगर में सहभागिता कर सकें।

💬 “सावन के महीने में हर आस्था का सम्मान हमारी जिम्मेदारी”: मौलाना सुब्हानी मियां

“पवित्र सावन के महीने में समाज के हर नागरिक की आस्था और धार्मिक अनुभूतियों का सम्मान करना हम सभी की साझा नैतिक जिम्मेदारी है। उर्स-ए-रजवी का मूल संदेश ही वैश्विक शांति, प्रेम और इंसानियत का है। अतः सभी लंगर कमेटियां ऐसा भोजन तैयार करें जिससे समाज में आपसी विश्वास और प्रगाढ़ हो, यही आला हजरत के उर्स की वास्तविक पहचान है।”

🕊️ सैकड़ों लंगरों में दिखेगी नई परंपरा, मथुरापुर व इस्लामिया मैदान में सजेंगे विशेष आयोजन

उर्स-ए-रजवी के अवसर पर प्रतिवर्ष बरेली के प्रसिद्ध इस्लामिया इंटर कॉलेज मैदान, मथुरापुर स्थित मदरसा जामियतुर्रजा तथा शहर के विभिन्‍न चौराहों पर वृहद स्तर पर धार्मिक जलसे आयोजित होते हैं।

इसके साथ ही सामाजिक संगठनों व स्वयंसेवकों (रजाकारों) की ओर से सैकड़ों लंगर लगाए जाते हैं। यद्यपि अब तक अधिकांश लंगरों में मांसाहारी पकवान बनाने की परंपरा रही थी, परंतु इस वर्ष उर्स में एक सकारात्मक एवं सौहार्दपूर्ण नई परंपरा का बीजारोपण देखने को मिलेगा।