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सबरीमाला सोना घोटाला की जांच अभी जारी

उच्च न्यायालय ने एसआईटी को और अतिरिक्त समय दिया

राष्ट्रीय खबर

तिरुअनंतपुरमः केरल उच्च न्यायालय ने गुरुवार को सबरीमाला स्वर्ण चोरी मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम को अतिरिक्त समय प्रदान किया। अदालत ने संज्ञान लिया कि मामले की अंतिम रिपोर्ट झारखंड के जमशेदपुर स्थित राष्ट्रीय धातुकर्म प्रयोगशाला से लंबित वैज्ञानिक विश्लेषण पर निर्भर है।

न्यायमूर्ति राजा विजयराघवन वी. और न्यायमूर्ति के. वी. जयकुमार की खंडपीठ ने एसआईटी के जांच अधिकारी एस. शशिधरन (आईपीएस) द्वारा व्यक्तिगत रूप से प्रस्तुत की गई रिपोर्ट पर विचार किया। अदालत ने उल्लेख किया कि अपने पिछले निर्देशों के अनुरूप, एसआईटी ने विशेषज्ञों की सहायता से पिलर प्लेट, सोने की परत वाली साइड पिलर प्लेट्स और द्वारपालक की मूर्ति की प्लेटों से नमूने एकत्र किए थे। टीम ने इन नमूनों को वैज्ञानिक विश्लेषण के लिए राष्ट्रीय धातुकर्म प्रयोगशाला को भेज दिया है।

जांट दल ने अदालत को सूचित किया कि इसमें शामिल प्रक्रियाओं की जटिलता के कारण प्रयोगशाला को अतिरिक्त समय की आवश्यकता होगी और परिणाम अप्रैल के अंत तक ही मिलने की उम्मीद है। इससे पहले अदालत ने एसआईटी को 31 मार्च तक जांच पूरी करने का निर्देश दिया था। हालांकि, यह देखा गया कि प्रयोगशाला के निष्कर्षों के बिना टीम कोई निर्णायक रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं कर सकती। इसे ध्यान में रखते हुए, पीठ ने अधिक समय दिया और मामले की अगली सुनवाई 18 मई के लिए निर्धारित की।

अदालत ने यह भी नोट किया कि द्वारपालक मूर्तियों के स्वर्ण परत की जांच जारी है, जिसमें अब तक 20 गवाहों से पूछताछ की जा चुकी है। जांच अधिकारी ने अदालत को बताया कि जांच त्वरित और व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ रही है, जिस पर पीठ ने संतोष व्यक्त किया। इससे पहले फरवरी में, उच्च न्यायालय ने एसआईटी को मूल क्लैड परतों और वर्तमान प्लेटेड सतहों की तुलना करने के लिए उन्नत वैज्ञानिक विश्लेषण करने की अनुमति दी थी।

एसआईटी ने रिपोर्ट दी थी कि प्रारंभिक निष्कर्षों से संकेत मिलता है कि मूल सोने की क्लैडिंग को हटा दिया गया था और उसके स्थान पर नई कोटिंग की एक पतली परत लगा दी गई थी। टीम ने इस बात पर जोर दिया कि सामग्री के परिवर्तन की सीमा, धातुकर्म संबंधी बदलावों की प्रकृति और मूल रूप से मौजूद सोने की मात्रा तथा बाद में हुई कमी का सटीक निर्धारण करने के लिए उन्नत वैज्ञानिक परीक्षण अनिवार्य हैं।