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मंगल ग्रह पर आबादी बसाने की सोच का पहला चरण पूरा

रोवर ने अपनी तकनीक से ऑक्सीजन पैदा किया

  • मॉक्सी यंत्र की मदद से ऐसा किया

  • सीओ 2 से ऑक्सीजन बनाया गया

  • अंतरिक्ष यात्रा की परेशानी अब कम होगी

राष्ट्रीय खबर

रांचीः ब्रह्मांड की गहराइयों को मापने की मानवीय जिज्ञासा अब एक ऐसे मुकाम पर पहुँच गई है, जहाँ दूसरे ग्रहों पर जीवन की संभावना केवल कल्पना नहीं, बल्कि एक वैज्ञानिक वास्तविकता बनती जा रही है।

हाल ही में नासा के पर्सिवरेंस रोवर ने मंगल ग्रह की सतह पर एक ऐसी ऐतिहासिक सफलता हासिल की है, जिसने भविष्य के मानव मिशनों की राह आसान कर दी है। रोवर में लगे मॉक्सी (मार्स ऑक्सीजन इन सिटू रिसोर्स यूनिलाइजेशन एक्सपेरिमेंट) उपकरण के उन्नत संस्करण ने मंगल के कार्बन डाइऑक्साइड युक्त पतले वातावरण से सफलतापूर्वक ऑक्सीजन का उत्पादन किया है।

मंगल ग्रह का वातावरण पृथ्वी की तुलना में बहुत अलग है; यहाँ 95 फीसद से अधिक कार्बन डाइऑक्साइड है और ऑक्सीजन की मात्रा नगण्य है। ऐसे में पृथ्वी से भारी मात्रा में ऑक्सीजन ले जाना न केवल खर्चीला है, बल्कि तकनीकी रूप से भी बेहद चुनौतीपूर्ण है। मॉक्सी तकनीक ने इस समस्या का समाधान इन-सिटू रिसोर्स यूटिलाइजेशन (आईएसआरयू) के माध्यम से निकाला है। यह प्रक्रिया मंगल की हवा से कार्बन डाइऑक्साइड अणुओं को सोखती है और विद्युत-रासायनिक प्रक्रिया के माध्यम से उन्हें ऑक्सीजन और कार्बन मोनोऑक्साइड में विभाजित कर देती है।

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इस हालिया परीक्षण में, मॉक्सी ने उम्मीद से कहीं अधिक कुशलता के साथ काम किया। वैज्ञानिकों के अनुसार, यह उपकरण अब एक छोटे पेड़ की क्षमता के बराबर ऑक्सीजन पैदा करने में सक्षम हो गया है। यह सफलता दो मुख्य कारणों से अत्यंत महत्वपूर्ण है। पहला, यह भविष्य के अंतरिक्ष यात्रियों के लिए सांस लेने योग्य हवा उपलब्ध कराएगा।

दूसरा और सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि रॉकेट को मंगल से वापस पृथ्वी पर भेजने के लिए भारी मात्रा में ऑक्सीजन की आवश्यकता होती है, जो ईंधन को जलाने के काम आती है। यदि हम मंगल पर ही ऑक्सीजन बना सकते हैं, तो हमें पृथ्वी से हजारों टन वजन ढोने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

इस तकनीक का सफल होना यह दर्शाता है कि हम अब केवल पृथ्वी के संसाधनों पर निर्भर नहीं हैं। नासा अब इस छोटे प्रोटोटाइप को एक बड़े पैमाने के कारखाने में बदलने की योजना बना रहा है, जो लगातार ऑक्सीजन बना सके। यह उपलब्धि न केवल तकनीकी कौशल का प्रमाण है, बल्कि यह मंगल ग्रह पर पहले मानव पदचिह्न स्थापित करने के हमारे सपने को हकीकत के और करीब ले आई है। अब वह दिन दूर नहीं जब लाल ग्रह पर भी मानव बस्तियाँ अपनी हवा खुद तैयार करेंगी।

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