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स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच आर-पार की जंग

राष्ट्रपति ट्रंप ने 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया

वाशिंगटन: मध्य पूर्व में तनाव अपने उच्चतम स्तर पर पहुँच गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को एक कड़ा अल्टीमेटम जारी करते हुए कहा है कि यदि ईरान ने 48 घंटों के भीतर स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज को पूरी तरह से और बिना किसी धमकी के नहीं खोला, तो संयुक्त राज्य अमेरिका ईरान के पावर प्लांट्स को मटियामेट कर देगा। ट्रंप ने स्पष्ट किया कि हमलों की शुरुआत ईरान के सबसे बड़े बिजली घर से की जाएगी। यह समयसीमा मंगलवार सुबह (भारतीय समयानुसार) समाप्त हो रही है।

ईरान ने 28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल द्वारा तेहरान पर किए गए संयुक्त हमलों के बाद से इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग को अधिकांश शिपिंग यातायात के लिए बंद कर दिया है। स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा की जीवनरेखा है, जहाँ से दुनिया का लगभग 20 प्रतिशत कच्चा तेल और तरलीकृत प्राकृतिक गैस गुजरती है।

इसके बंद होने से कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आया है और दुनिया भर में मुद्रास्फीति (महंगाई) का खतरा बढ़ गया है। ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी और यूएई सहित कई देशों ने ईरान के इस कदम की कड़ी निंदा की है। हालांकि, ईरान के संसद अध्यक्ष मोहम्मद-बाघेर गालिबाफ ने स्पष्ट किया है कि हॉर्मुज अब युद्ध-पूर्व की स्थिति में वापस नहीं लौटेगा।

ट्रंप के अल्टीमेटम के जवाब में ईरान की सैन्य परिचालन कमान खातम अल-अंबिया ने एक बयान जारी कर कहा कि यदि ईरान के ऊर्जा ढांचे को नुकसान पहुँचाया गया, तो क्षेत्र में मौजूद अमेरिका और उसके सहयोगियों के सभी सूचना प्रौद्योगिकी, ऊर्जा और जल शोधन केंद्रों को निशाना बनाया जाएगा। इस बीच, शनिवार को ईरान के नतान्ज़ परमाणु संवर्धन केंद्र पर हवाई हमला हुआ, जो युद्ध की शुरुआत के बाद दूसरा हमला है। इसके जवाब में ईरान ने इजराइल के डिमोना (जहाँ परमाणु केंद्र स्थित है) और अरद शहर पर मिसाइलें दागीं, जिसमें 100 से अधिक लोग घायल हो गए।

रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि हॉर्मुज को खोलने की कोशिश की भी जाती है, तो इसमें महीनों लग सकते हैं क्योंकि समुद्र में तैरते हुए विस्फोटक और बारूदी सुरंगें एक बड़ा खतरा हैं। ट्रंप का यह रुख उनके उस बयान के ठीक एक दिन बाद आया है जिसमें उन्होंने युद्ध को समाप्त करने की बात कही थी। वर्तमान स्थिति ने मध्य पूर्व को एक ऐसे मुहाने पर खड़ा कर दिया है जहाँ से एक छोटी सी चूक भी पूर्ण पैमाने पर विश्वव्यापी ऊर्जा संकट और भीषण युद्ध का कारण बन सकती है।