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नक्सलियों के पास सिर्फ 9 दिन! झारखंड-छत्तीसगढ़ बॉर्डर पर सुरक्षाबलों का ‘महा-अभियान’; जंगलों में छिपे खूंखार कमांडरों की सांसें अटकीं

लातेहार: जिले में नक्सलियों के खिलाफ निर्णायक अभियान शुरू हो गया है. पुलिस और सुरक्षा बलों की टीमें नक्सलियों के पूर्ण उन्मूलन के लिए छत्तीसगढ़ की सीमा तक जंगलों में अभियान चला रही हैं. नक्सलियों की सप्लाई चेन को भी पूरी तरह ध्वस्त कर दिया गया है. सशस्त्र सीमा बल 32वीं बटालियन के कमांडेंट राजेश सिंह ने कहा है कि नक्सलियों के पास अब कुछ ही दिन बचे हैं. उनके पास अब केवल एक ही रास्ता बचा है आत्मसमर्पण कर अपने जीवन की रक्षा करना.

दरअसल, केंद्र सरकार ने 31 मार्च तक पूरे देश को नक्सली मुक्त बनाने का लक्ष्य रखा है. इसी लक्ष्य के अनुरूप लातेहार जिले को भी 31 मार्च तक पूरी तरह नक्सली मुक्त बनाने के लिए पुलिस और सुरक्षा बलों की टीमें लगातार सक्रिय हैं. पिछले कुछ दिनों से जिले में नक्सलियों के खिलाफ निर्णायक अभियान शुरू किया गया है, जिसमें सशस्त्र सीमा बल 32वीं बटालियन की पांच कंपनियों के साथ-साथ जिला पुलिस, सीआरपीएफ और अन्य सुरक्षा बलों की टीमें जुटी हुई हैं. इन टीमों ने लातेहार के सभी संभावित जंगलों के साथ छत्तीसगढ़ की सीमा तक नक्सलियों को घेरने के लिए पूर्णप्रूफ योजना तैयार की है.

तीन माओवादी और दो जेजेएमपी नक्सली सक्रिय

जानकारी के अनुसार, लातेहार जिले में वर्तमान में माओवादी के तीन और जेजेएमपी के दो नक्सली सक्रिय हैं. माओवादी नक्सलियों में 5 लाख का इनामी सबजोनल कमांडर सुखलाल बृजिया, 5 लाख का इनामी सबजोनल कमांडर राजू भुइयां और 5 लाख का इनामी सबजोनल कमांडर अनिल तुरी शामिल हैं. हालांकि, रिजनल कमांडर 15 लाख का इनामी रविंद्र गंझू और जोनल कमांडर मनोहर गंझू का नाम भी सूची में शामिल है. वहीं, जेजेएमपी नक्सली संगठन में 5 लाख का इनामी रामदेव लोहरा और 5 लाख का इनामी शिवा शामिल हैं. ये सभी नक्सली पुलिस और सुरक्षा बलों के निशाने पर हैं.

नक्सलियों की सप्लाई चेन ध्वस्त

इस संबंध में जानकारी देते हुए सशस्त्र सीमा बल 32वीं बटालियन के कमांडेंट राजेश सिंह ने बताया कि पुलिस और सुरक्षा बलों के संयुक्त प्रयासों से नक्सलियों की सप्लाई चेन पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है. उन्होंने कहा कि नक्सलियों को सहयोग करने वाले लोग भी अब पुलिस और सुरक्षा बलों के निशाने पर हैं. सप्लाई चेन ध्वस्त होने के कारण ही कुछ दिन पहले दो बड़े नक्सलियों की गिरफ्तारी हुई थी.

आत्मसमर्पण ही जीवन रक्षा का एकमात्र रास्ता

सशस्त्र सीमा बल के कमांडेंट राजेश सिंह ने कहा कि नक्सलियों के पास अब मात्र चंद दिन बचे हैं. इन शेष दिनों में पुलिस और सुरक्षा बलों का अभियान और तेज होगा तथा लगातार जारी रहेगा. उन्होंने कहा कि नक्सलियों के पास अपनी जान बचाने के लिए अब केवल एक ही रास्ता बचा है, हथियार डालकर आत्मसमर्पण करना और समाज की मुख्यधारा में शामिल होना. आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को सरकारी प्रावधानों के तहत सभी सुविधाएं उपलब्ध होंगी और उनका जीवन सुरक्षित रहेगा. उन्होंने नक्सलियों के परिजनों से भी अपील की है कि वे नक्सलियों को आत्मसमर्पण के लिए प्रेरित करें और अपने परिवार को खुशहाल बनाएं.