ऑपरेशन ईटन स्ट्रॉ के तहत दागे दर्जनों रॉकेट
बेरूतः लेबनान के ईरान समर्थित सशस्त्र समूह हिजबुल्लाह ने बुधवार को उत्तरी इज़रायल के खिलाफ एक नया सैन्य अभियान शुरू करने की घोषणा की है। हिजबुल्लाह ने इस ऑपरेशन को अल-असफ अल-माकुल (ऑपरेशन ईटन स्ट्रॉ) नाम दिया है। इस अभियान के तहत उत्तरी इज़रायल के सैन्य ठिकानों और बस्तियों पर 150 से अधिक रॉकेटों और उन्नत मिसाइलों से हमला किया गया है।
हिजबुल्लाह के एक आधिकारिक बयान के अनुसार, यह कार्रवाई लेबनान के दर्जनों शहरों और विशेष रूप से बेरुत के दक्षिणी उपनगरों (दहियाह) पर इज़रायल द्वारा किए जा रहे आपराधिक हमलों का करारा जवाब है। समूह ने दावा किया है कि उसके लड़ाकों ने उत्तरी इज़रायल में स्थित ददो सैन्य बेस, हाइफा नौसेना बेस और गैलिली क्षेत्र के कई ठिकानों को सफलतापूर्वक निशाना बनाया है। इज़रायली रक्षा बलों के अनुसार, अधिकांश रॉकेटों को वायु रक्षा प्रणालियों द्वारा नष्ट कर दिया गया, लेकिन कुछ रॉकेट रिहायशी इलाकों में भी गिरे।
हिजबुल्लाह के इन हमलों के जवाब में इज़रायल ने लेबनान की राजधानी बेरुत के दक्षिणी हिस्सों पर भीषण हवाई हमले किए हैं। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, बेरुत के आसमान में धमाकों की गूँज सुनाई दी और चारों तरफ धुएँ के गुबार देखे गए। इज़रायली सेना ने चेतावनी दी है कि वे हिजबुल्लाह के बुनियादी ढांचे और रॉकेट लॉन्चिंग पैड्स को पूरी तरह नष्ट कर देंगे। इज़रायली अधिकारियों ने यह भी संकेत दिया है कि यदि लेबनान सरकार हिजबुल्लाह की गतिविधियों पर लगाम नहीं लगाती है, तो वे लेबनानी राष्ट्रीय बुनियादी ढांचे को भी निशाना बना सकते हैं।
यह तनाव मार्च 2026 की शुरुआत में ईरान और इज़रायल के बीच शुरू हुए बड़े युद्ध का हिस्सा है। लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, पिछले 10 दिनों में इज़रायली हमलों में 630 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं और लगभग 8 लाख लोग विस्थापित हुए हैं। हिजबुल्लाह और ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने इस ऑपरेशन को एकीकृत अभियान बताया है, जो इस युद्ध के और अधिक विस्तार की ओर संकेत करता है।