शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के मामले में अदालती राय
राष्ट्रीय खबर
लखनऊः इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को उत्तर प्रदेश के प्रमुख धार्मिक व्यक्तित्व शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को यौन अपराधों से बच्चों के संरक्षण अधिनियम के तहत दर्ज एक मामले में गिरफ्तारी से अंतरिम संरक्षण प्रदान किया है।
न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा ने उनके शिष्य स्वामी मुकुंदानंद गिरि को भी संरक्षण दिया है। हालांकि, अदालत ने यह स्पष्ट किया कि मामले की जांच जारी रहेगी। अदालत ने अपने आदेश में कहा, इस आवेदन के निपटारे तक, यह प्रावधान किया जाता है कि आवेदकों को अपराध संख्या 58/2026, बीएनएस की धारा 351(3) और पोक्सो अधिनियम की विभिन्न धाराओं (5(1), 6, 3, 4(2), 16 और 17) के तहत गिरफ्तार नहीं किया जाएगा, जो थाना झूंसी, जिला प्रयागराज में दर्ज है। उन्हें जांच में सहयोग करने का निर्देश दिया गया है और जांच जारी रहेगी।
हाल ही में, एक विशेष पोक्सो पोक्सो अदालत ने पुलिस को स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के खिलाफ यौन शोषण के आरोपों की जांच करने के लिए मामला दर्ज करने का आदेश दिया था। यह आरोप लगाया गया था कि स्वामी ने एक शिविर में दो नाबालिग लड़कों का यौन शोषण किया था। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, यह आदेश कृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह विवाद में वादी, शंकारी पीठाधीश्वर आशुतोष महाराज द्वारा की गई शिकायत पर पारित किया गया था।
प्रयागराज पुलिस द्वारा प्राथमिकी दर्ज किए जाने के बाद, आरोपियों ने अग्रिम जमानत के लिए उच्च न्यायालय का रुख किया था। आज, अदालत ने याचिका पर अपना अंतिम आदेश सुरक्षित रख लिया और सभी पक्षों को 12 मार्च तक केस कानूनों के साथ लिखित दलीलें दाखिल करने का निर्देश दिया है।
इस मामले में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता दिलीप कुमार, अधिवक्ता राजश्री गुप्ता और सुधांशु कुमार ने पैरवी की। वहीं, राज्य सरकार का प्रतिनिधित्व अपर महाधिवक्ता मनीष गोयल, सरकारी अधिवक्ता पतंजलि मिश्रा और अपर सरकारी अधिवक्ता रूपक चौबे ने किया। शिकायतकर्ता का पक्ष अधिवक्ता रीना एन. सिंह ने रखा।