कानून के रखवाले ऐसा नहीं कर सकतेः सुप्रीम कोर्ट
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जनता का भरोसा टूट जाता है
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पिता पुत्री से जेवन लिये गये थे
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तीनों पुलिसवाले बर्खास्त हो गये हैं
राष्ट्रीय खबर
नईदिल्लीः सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में एक ज्वैलर से कथित तौर पर पैसे ऐंठने के आरोपी तीन पुलिस अधिकारियों को मिली अग्रिम जमानत रद्द कर दी है। अदालत ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि जब कानून के रखवाले ही जबरन वसूली करने वाले बन जाते हैं, तो नागरिक दुविधा में पड़ जाते हैं क्योंकि जिन लोगों से उन्हें सुरक्षा की उम्मीद होती है, उन्हें ही अब नागरिकों को उनके खिलाफ सुरक्षा की मांग करनी पड़ती है।
अदालत ने कहा, जब कानून के रखवाले ही जबरन वसूली करने लगें, तो नागरिक सकते में आ जाता है और एक दुविधा में फंस जाता है। विरोध करने का मतलब है तत्काल प्रतिशोध को बुलावा देना, और ऐसे में एकमात्र विकल्प वर्दीधारी अधिकारियों के सामने चुपचाप झुकना ही रह जाता है, भले ही वहां अधिकारों का स्पष्ट दुरुपयोग हो रहा हो।
मामला यह है कि एक व्यक्ति अपनी नाबालिग बेटी और साले के साथ मुंबई से यात्रा कर रहा था। उन्हें रेलवे स्टेशन पर पुलिस द्वारा हिरासत में लिया गया। उनके बैग की तलाशी के दौरान 14 ग्राम सोने की बिस्किट और 31,900 रुपये नकद मिले। आरोप है कि उन्हें पास के एक कमरे में ले जाया गया और सोने की बिस्किट के बदले जबरन नकदी ले ली गई। पिता ने इसके बाद प्राथमिकी दर्ज कराई, जिसके बाद सत्र न्यायालय ने पुलिस अधिकारियों की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी थी। हालांकि, बॉम्बे हाईकोर्ट ने जांच के दौरान एकत्र किए गए सीसीटीवी फुटेज को देखने के बाद उन्हें अग्रिम जमानत दे दी थी। हाईकोर्ट का मानना था कि आरोपी अपनी पहचान पत्र पहने हुए थे, और पीड़ित पिता व उनकी बेटी के व्यवहार में कोई परेशानी नहीं दिखी थी, साथ ही प्राथमिकी दर्ज करने में देरी हुई थी।
इस फैसले को महाराष्ट्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका के माध्यम से चुनौती दी। सुनवाई के दौरान राज्य की ओर से पेश अधिवक्ता भरत बागला ने तर्क दिया कि विभिन्न दिशानिर्देशों के अनुसार, तलाशी और जब्ती की प्रक्रिया वीडियो रिकॉर्डिंग के साथ की जानी चाहिए, लेकिन पुलिसकर्मी पिता और उनकी बेटी को ऐसे कमरे में ले गए जहां कैमरे नहीं थे। उन्होंने आगे कहा कि राज्य नागरिकों के खिलाफ वर्दीधारी अधिकारियों की ऐसी ज्यादतियों को बर्दाश्त नहीं करता है और अदालत को सूचित किया कि उचित जांच के बाद उन तीनों अधिकारियों को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है।