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शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का मामला और उलझा

मानवाधिकार आयोग ने पोक्सो मामले में लिया संज्ञान

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने बुधवार को ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के खिलाफ दर्ज पोक्सो अधिनियम के मामले को चुनौती देने वाली एक शिकायत पर संज्ञान लिया है। डीके फाउंडेशन ऑफ फ्रीडम एंड जस्टिस नामक मानवाधिकार संस्था ने मानवाधिकार आयोग में शिकायत दर्ज कराई थी, जिसमें आरोप लगाया गया है कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के खिलाफ पुलिस शक्तियों का दुरुपयोग किया जा रहा है और यह एफआईआर पूरी तरह से राजनीति से प्रेरित है।

आयोग ने इस मामले को दर्ज कर लिया है और उत्तर प्रदेश सरकार तथा पुलिस महानिदेशक (DGP) से विस्तृत रिपोर्ट तलब करने की प्रक्रिया शुरू की है। फाउंडेशन ने शिकायतकर्ता के आपराधिक इतिहास का ब्यौरा भी आयोग को सौंपा है और मांग की है कि यह जांच की जाए कि कहीं यह मामला किसी व्यक्तिगत प्रतिशोध या दुर्भावना से तो प्रेरित नहीं है।

प्रयागराज के झूसी थाने में भारतीय न्याय संहिता और पोक्सो अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत दर्ज प्राथमिकी में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद, उनके शिष्य मुकुंदानंद ब्रह्मचारी और दो-तीन अज्ञात व्यक्तियों को नामजद किया गया है। दो शिष्यों (जिनमें एक नाबालिग है) ने 13 जनवरी, 2025 से 15 फरवरी, 2026 के बीच यौन शोषण का आरोप लगाया है। ये घटनाएं कथित तौर पर 2025 के कुंभ मेले और 2026 के माघ मेले के दौरान शिविर परिसरों और वाहनों में हुई बताई गई हैं।

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे अपनी छवि खराब करने के लिए रचा गया निर्मित षड्यंत्र करार दिया है। उन्होंने निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए पुलिस को पूर्ण सहयोग देने का आश्वासन दिया है।

यह मामला प्रयागराज के माघ मेले के दौरान हुई उस घटना की पृष्ठभूमि में आया है, जब शंकराचार्य और उनके समर्थकों को संगम पर पवित्र डुबकी लगाने से प्रशासन ने रोक दिया था। इसके बाद शंकराचार्य और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बीच तीखी बयानबाजी हुई थी। मुख्यमंत्री ने बिना नाम लिए कालनेमी (रामायण का एक राक्षस) का उल्लेख करते हुए संतों से सावधान रहने की चेतावनी दी थी, जिस पर शंकराचार्य ने पलटवार करते हुए कहा था कि योगी आदित्यनाथ को राजनीति करनी चाहिए और धर्म के मामले संतों पर छोड़ देने चाहिए।