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मस्तिष्क को खुद ठीक करने में करेगा मदद, देखें वीडियो

वैज्ञानिकों ने सुपरचार्ज्ड विटामिन के तैयार करने में सफलता पायी

  • जापान के शोधकर्ताओँ की नई खोज

  • कई दिमागी बीमारियों में मददगार

  • अभी क्लीनिकल ट्रायल होना बाकी

राष्ट्रीय खबर

रांचीः अल्जाइमर, पार्किंसंस और हंटिंगटन जैसे रोग न्यूरॉन्स (तंत्रिका तंत्र में संदेश ले जाने वाली कोशिकाएं) को नष्ट करके मस्तिष्क को धीरे-धीरे नुकसान पहुंचाते हैं। इन कोशिकाओं के नष्ट होने से याददाश्त की समस्याएं, संज्ञानात्मक गिरावट और चलने-फिरने में कठिनाई जैसी गंभीर समस्याएं होती हैं, जिनके लिए निरंतर देखभाल की आवश्यकता पड़ती है।

वर्तमान दवाएं केवल लक्षणों को कुछ हद तक कम कर सकती हैं, लेकिन वे खोई हुई याददाश्त या क्षतिग्रस्त मस्तिष्क ऊतकों को बहाल नहीं कर सकतीं। अब शोधकर्ता एक महत्वाकांक्षी विचार पर काम कर रहे हैं: मस्तिष्क को नष्ट हो चुके न्यूरॉन्स को फिर से बनाने में मदद करना। विटामिन-के मुख्य रूप से रक्त के थक्के जमने और हड्डियों के स्वास्थ्य के लिए जाना जाता है, लेकिन हाल के वर्षों में वैज्ञानिकों ने इसे मस्तिष्क की सुरक्षा और न्यूरोनल डिफरेंशिएशन (अपरिपक्व कोशिकाओं का न्यूरॉन्स में बदलना) से भी जोड़ा है।

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जापान के शिबाउरा इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के शोधकर्ताओं ने विटामिन के के ऐसे एनालॉग विकसित किए हैं जो तंत्रिका तंत्र में कहीं अधिक सक्रिय हैं। एसोसिएट प्रोफेसर योशिहिसा हिरोटा और प्रोफेसर योशितोमो सुहारा के नेतृत्व में किए गए इस शोध में पाया गया कि ये नए सिंथेटिक एनालॉग, प्राकृतिक विटामिन के की तुलना में न्यूरॉन्स बनाने में लगभग तीन गुना अधिक प्रभावी हैं।

टीम ने 12 हाइब्रिड विटामिन के होमोलॉग्स का संश्लेषण किया। इनमें से एक यौगिक, जिसे नोवेल विटामिन के (नॉवल वीके) नाम दिया गया, ने न्यूरोनल वृद्धि में सबसे बेहतरीन परिणाम दिखाए। शोध से पता चला कि यह प्रक्रिया मेटाबोट्रोपिक ग्लूटामेट रिसेप्टर्स के माध्यम से काम करती है, जो सिनैप्टिक ट्रांसमिशन और मस्तिष्क की कार्यप्रणाली के लिए महत्वपूर्ण हैं।

महत्वपूर्ण बात यह है कि चूहों पर किए गए प्रयोगों में पाया गया कि नोवेल वीके न केवल मस्तिष्क में बेहतर तरीके से प्रवेश करता है, बल्कि रक्त-मस्तिष्क बाधा को पार करने और मस्तिष्क में उच्च सांद्रता तक पहुँचने में भी सक्षम है। हालांकि यह शोध अभी शुरुआती चरणों (कोशिका और चूहे के प्रयोगों) में है और इसे मनुष्यों पर परीक्षण की आवश्यकता है, लेकिन यह भविष्य के उपचार के लिए एक बड़ी उम्मीद जगाता है।

डॉ. हिरोटा के अनुसार, यह शोध न्यूरोडीजेनेरेटिव रोगों के इलाज के लिए एक अभूतपूर्व दृष्टिकोण प्रदान करता है। यदि यह चिकित्सा सुरक्षित और प्रभावी साबित होती है, तो यह न केवल मरीजों के जीवन की गुणवत्ता में सुधार करेगी, बल्कि लंबे समय तक देखभाल के बोझ को भी काफी कम कर सकेगी।

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