राफेल के अलावा अब फ्रांस निर्मित सबमेरिनों पर भी चर्चा
राष्ट्रीय खबर
नईदिल्लीः फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने गुरुवार को कहा कि राफेल लड़ाकू विमान भारत की सैन्य शक्ति को और मजबूत करेंगे। उन्होंने मोदी सरकार की मंशा के अनुरूप मेड-इन-इंडिया राफेल में स्वदेशी सामग्री को बढ़ाने की प्रतिबद्धता जताई। अपनी तीन दिवसीय यात्रा के अंत में एआई-इंडिया समिट के इतर मीडिया से बात करते हुए मैक्रों ने कहा, राफेल हमारे रणनीतिक संबंधों को बेहतर बनाता है और यहाँ रोजगार के अधिक अवसर पैदा करता है।
पिछले साल ऑपरेशन सिंदूर के दौरान इस लड़ाकू विमान के प्रदर्शन पर पश्चिमी हलकों में हुई आलोचना के जवाब में राष्ट्रपति ने कहा, मुझे समझ नहीं आता कि लोग इस विमान की आलोचना कैसे कर सकते हैं, क्योंकि राफेल आपके देश को और अधिक शक्तिशाली बनाता है। मैक्रों ने घोषणा की कि फ्रांस और भारत अब रक्षा सहयोग के एक नए युग में प्रवेश कर रहे हैं, जिसमें राफेल विमानों के साथ-साथ हेलीकॉप्टरों के संयुक्त उत्पादन की भी योजना है।
उन्होंने आगे कहा, राफेल के मामले में हम विस्तार करना चाहते हैं। भारत ने कुछ दिन पहले ही 114 नए राफेल विमानों के ऑर्डर और भारत में सह-उत्पादन की इच्छा की पुष्टि की है। भारत द्वारा 114 अतिरिक्त राफेल विमानों का यह संभावित ऑर्डर रक्षा संबंधों में एक नया कदम है। विमान के सह-उत्पादन में भारतीय कलपुर्जों की मांग पर मैक्रों ने स्पष्ट किया कि वे भारत में अधिकतम संख्या में महत्वपूर्ण उपकरणों के निर्माण के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं।
भारत को और अधिक फ्रांसीसी पनडुब्बियां बेचने की इच्छा जताते हुए मैक्रों ने राफेल सौदे का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा, मुझे उम्मीद है कि हम पनडुब्बियों के मामले में भी ऐसा ही करेंगे। हमने अतिरिक्त क्षमता की पेशकश की है। वर्तमान में भारतीय नौसेना छह फ्रांसीसी स्कॉर्पीन पनडुब्बियों का संचालन करती है और निकट भविष्य में कम से कम तीन और ऐसी पनडुब्बियां लेने की योजना है। राष्ट्रपति ने भारत की सह-उत्पादन की महत्वाकांक्षा को तार्किक बताया और कहा कि 2040 और 2050 तक भारत को उन्नत लड़ाकू विमानन की भारी आवश्यकता होगी। उन्होंने इस साझेदारी को ग्लोबल स्पेशल स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप करार दिया, जो दोनों देशों के लिए अद्वितीय है।