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यह जीवित प्लास्टिक खुद को नष्ट कर लेता है, देखें वीडियो

दुनिया के सबसे बड़े प्रदूषण से मुक्ति का नया मार्ग

  • छह दिन के बाद सक्रिय होते हैं बैक्टेरिया

  • अंदर से आणविक स्तर पर तोड़ देते हैं

  • पानी के भीतर के लिए अलग शोध जारी

राष्ट्रीय खबर

रांचीः आज के आधुनिक युग में प्लास्टिक हमारे जीवन का एक अनिवार्य हिस्सा बन चुका है। इनमें से कई प्लास्टिक की वस्तुएं ऐसी होती हैं जिनका उपयोग हम केवल कुछ मिनटों या घंटों के लिए ही करते हैं, लेकिन उपयोग के बाद यह सामग्रियां हमारे पर्यावरण में दशकों या सदियों तक जस की तस बनी रहती हैं और प्रदूषण का एक गंभीर कारण बनती हैं। अब शोधकर्ताओं ने एक ऐसा अनूठा प्लास्टिक विकसित किया है जो एक निश्चित समय पर सक्रिय होने के बाद खुद को पूरी तरह से नष्ट करने में सक्षम है।

इस शोध पत्र के प्रमुख लेखकों में से एक, झुओजुन दाई ने इस आविष्कार की पृष्ठभूमि पर प्रकाश डालते हुए बताया कि उनके सहयोगियों ने बैसिलस सबटिलिस नामक बैक्टीरिया को जेनेटिक रूप से इंजीनियर किया। उन्होंने इसे इस प्रकार तैयार किया कि यह एक साथ दो पॉलीमर-विघटनकारी एंजाइमों का उत्पादन कर सके जो मिलकर काम करते हैं।

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शोधकर्ताओं ने इस प्रक्रिया को अंजाम देने के लिए सुप्त बैसिलस सबटिलिस के बीजाणुओं को पॉलीकैप्रोलैक्टोन के साथ मिलाया। पॉलीकैप्रोलैक्टोन एक ऐसा पॉलीमर है जिसका उपयोग आमतौर पर 3डी प्रिंटिंग और कुछ सर्जिकल टांके लगाने में किया जाता है। बैक्टीरिया को सक्रिय करने के लिए, वैज्ञानिकों ने 122 डिग्री फारेनहाइट (50 डिग्री सेल्सियस) तक गर्म किए गए एक पोषक शोरबा को सामग्री में मिलाया।

गर्मी और पोषण मिलते ही बीजाणु सक्रिय हो गए और दोनों एंजाइमों का उत्पादन करने लगे। देखते ही देखते मात्र छह दिनों के भीतर वह प्लास्टिक पूरी तरह से अपने बुनियादी बिल्डिंग ब्लॉक्स में टूट गया। वास्तविक उपयोग को प्रदर्शित करने के लिए शोधकर्ताओं ने एक पहनने योग्य प्लास्टिक इलेक्ट्रोड बनाया, जिसने पहले अपना काम बखूबी किया और सक्रिय होने के दो सप्ताह के भीतर पूरी तरह गायब हो गया।

अब वैज्ञानिकों की टीम एक ऐसी विधि विकसित करने की उम्मीद कर रही है जो पानी में भी इन बैक्टीरियल बीजाणुओं को सक्रिय कर सके, क्योंकि वैश्विक प्लास्टिक प्रदूषण का एक बहुत बड़ा हिस्सा हमारे महासागरों और जल निकायों में जमा होता है।

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