केंद्रीय जांच ब्यूरो ने भुवनेश्वर में बड़ी कार्रवाई की है
राष्ट्रीय खबर
भुवनेश्वरः केंद्रीय जांच ब्यूरो ने 1,109 करोड़ रुपये की भारी-भरकम कैनरा बैंक धोखाधड़ी मामले में भुवनेश्वर स्थिति गुप्ता पावर इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड और उसके शीर्ष प्रबंधन के खिलाफ एक बड़ी और सख्त कार्रवाई की है। इस अंतरराज्यीय वित्तीय घोटाले की गहन जांच के सिलसिले में सीबीआई की टीमों ने देश के चार अलग-अलग राज्यों—पश्चिम बंगाल, ओडिशा, तमिलनाडु और उत्तराखंड—में स्थित छह प्रमुख ठिकानों पर एक साथ व्यापक छापेमारी की।
केंद्रीय जांच एजेंसी द्वारा दी गई आधिकारिक जानकारी के अनुसार, यह समन्वित छापेमारी 18 जुलाई को आयोजित की गई थी। सीबीआई ने यह त्वरित कार्रवाई भुवनेश्वर स्थित विशेष सीबीआई अदालत द्वारा जारी तलाशी वारंट के आधार पर अमल में लाई। इस तलाशी अभियान के दौरान भुवनेश्वर में कंपनी के चार आरोपी निदेशकों के निजी आवासीय परिसरों की बारीकी से जांच की गई। इसके अलावा कोलकाता स्थित कंपनी के पंजीकृत मुख्य कार्यालय, तथा उत्तराखंड के काशीपुर, तमिलनाडु के तिरुवल्लूर और ओडिशा के भुवनेश्वर में स्थित विनिर्माण और औद्योगिक इकाइयों पर भी एक साथ छापेमारी कर महत्वपूर्ण साक्ष्य जुटाए गए।
सार्वजनिक क्षेत्र के कैनरा बैंक के साथ इतनी बड़ी वित्तीय धोखाधड़ी को अंजाम देने के आरोप में सीबीआई ने गुप्ता पावर इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड और उसके निदेशकों के खिलाफ नामजद आपराधिक प्राथमिकी दर्ज की है। जांच एजेंसी का गंभीर आरोप है कि कंपनी प्रबंधन ने बैंक से विभिन्न फंड-आधारित और गैर-फंड-आधारित वित्तीय सुविधाएं तथा ऋण सीमाएं प्राप्त की थीं, जिसके बाद बैंक फंड का योजनाबद्ध तरीके से दुरुपयोग किया गया।
आरोप है कि कंपनी के शीर्ष प्रबंधन ने बैंक को धोखा देने के उद्देश्य से स्टॉक मूल्यों में भारी हेरफेर की, व्यापारिक प्राप्तियों के आंकड़ों को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया, तथा वित्तीय विवरणों और बैलेंस शीट में बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़ा किया। इतना ही नहीं, स्वीकृत ऋण राशि का उपयोग लक्षित व्यवसाय के बजाय अन्य अनधिकृत कार्यों में डायवर्ट कर दिया गया। साथ ही, बही-खातों की एवरग्रीनिंग करके बैंक को जानबूझकर करोड़ों रुपये का भारी गलत नुकसान पहुँचाया गया। सीबीआई की टीम फिलहाल छापेमारी के दौरान जब्त किए गए दस्तावेजों, डिजिटल साक्ष्यों और वित्तीय रिकॉर्ड्स की गहन जांच कर रही है, ताकि इस बहु-करोड़ रुपये के घोटाले के मुख्य षड्यंत्रकारियों और सहयोगियों पर शिकंजा कसा जा सके।