सुप्रीम कोर्ट में सीलबंद लिफाफे में रिपोर्ट दाखिल
राष्ट्रीय खबर
नईदिल्लीः श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को मिले दान और चढ़ावे में वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों को लेकर दायर याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में महत्वपूर्ण सुनवाई से ठीक पहले, उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल ने अपनी स्टेटस रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में शीर्ष अदालत के समक्ष दाखिल कर दी है।
सर्वोच्च अदालत की आधिकारिक वेबसाइट पर अपलोड की गई वाद सूची के अनुसार, भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ इन याचिकाओं पर सुनवाई करेगी। इस मामले में अधिवक्ता नरेंद्र कुमार गोस्वामी, याचिकाकर्ता अजय कुमार राय, राष्ट्रीय जनता दल के सांसद सुधाकर सिंह और हिंदू धर्म परिषद द्वारा अलग-अलग याचिकाएं दायर की गई हैं।
इससे पहले 13 जुलाई को सुनवाई के दौरान, सीजेआई सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने मामले में नोटिस जारी करते हुए राज्य सरकार की एसआईटी को जांच की प्रगति रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए थे। कोर्ट ने कहा था कि चूंकि कुछ मामलों में प्राथमिकी दर्ज हो चुकी है और एसआईटी का गठन किया गया है, इसलिए जांच दल अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करे तथा एसआईटी के गठन और उसके सदस्यों की पूरी जानकारी भी कोर्ट को दे।
सुनवाई के दौरान केंद्र और राज्य सरकार की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को आश्वस्त किया था कि स्टेटस रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में दी जाएगी। जब याचिकाकर्ताओं ने रिपोर्ट की प्रति मांगने का अनुरोध किया, तो सॉलिसिटर जनरल ने इसका विरोध करते हुए कहा कि जांच अभी जारी है। इस पर पीठ ने टिप्पणी की कि चूंकि जांच चल रही है, इसलिए फिलहाल रिपोर्ट की प्रति साझा करने पर बाद में विचार किया जाएगा।
याचिकाकर्ताओं ने राम मंदिर ट्रस्ट के दान-चढ़ावे के प्रबंधन में न्यायालय की निगरानी में निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। राजद सांसद सुधाकर सिंह की याचिका में मामले की जांच सीबीआई को सौंपने, एक अस्थायी निगरानी समिति बनाने, फोरेंसिक ऑडिट कराने और ट्रस्ट की वेबसाइट पर दान का पारदर्शी ब्योरा व ऑडिटेड वित्तीय विवरण सार्वजनिक करने की अपील की गई है।