आतंकवाद पर भारत के बदले तेवर को स्पष्ट किया रक्षा मंत्री ने
-
अब हमारी सोच जीरो टॉलरेंस की है
-
ऑपरेशन सिंदूर से प्रमाण दे दिया है
-
पूरे क्षेत्र में भारतीय ताकत मजबूत है
राष्ट्रीय खबर
नईदिल्लीः रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पाकिस्तान और आतंकवादियों को बेहद कड़ा संदेश दिया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि भारत ने आतंकवाद के खिलाफ अपनी वैश्विक दृष्टि को पूरी दुनिया के सामने मजबूती से रखा है। उन्होंने जोर देकर कहा, आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस हमारे लिए केवल एक बयान नहीं है, बल्कि हमारा लाइन ऑफ एक्शन है। हम आतंकवाद पर सिर्फ अपनी दहलीज पर ही नहीं, बल्कि घर में घुसकर भी वार करेंगे।
रक्षा मंत्री ने उदाहरण देते हुए कहा कि पूरी दुनिया ने भारत के इस बदले रुख को ऑपरेशन सिंदूर के दौरान देखा है। उन्होंने इस सैन्य ऑपरेशन को तकनीकी युद्ध कौशल का एक शानदार उदाहरण बताया, जिसमें आकाशतीर मिसाइल सिस्टम, आकाश मिसाइल प्रणाली और ब्रह्मोस जैसी उन्नत स्वदेशी मिसाइलों का बखूबी इस्तेमाल किया गया।
भारत की बढ़ती सैन्य और रणनीतिक ताकत का जिक्र करते हुए राजनाथ सिंह ने बताया कि देश आज एक विश्वसनीय वैश्विक सुरक्षा भागीदार के रूप में तेजी से उभर रहा है। हिंद महासागर से लेकर भारत-प्रशांत क्षेत्र तक भारत की भूमिका लगातार मजबूत हो रही है। उन्होंने रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को मोदी सरकार का सबसे बड़ा कदम बताया।
रक्षा मंत्री के अनुसार, भारत में बने सैन्य उत्पाद आज दुनिया के करीब 100 देशों को निर्यात किए जा रहे हैं। देश का कुल वार्षिक रक्षा उत्पादन अब रिकॉर्ड 1.78 लाख करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गया है। उन्होंने भरोसा जताया कि सरकार के विजन के चलते भारत वर्ष 2029 तक 3 लाख करोड़ रुपये के रक्षा उत्पादन का मील का पत्थर छूने के लिए पूरी तरह तैयार है।
पिछली सरकारों पर निशाना साधते हुए राजनाथ सिंह ने कहा कि पहले की सरकारों को भारत की सैन्य क्षमताओं पर उतना भरोसा नहीं था, जितना आज है। यदि कोई देश हथियारों, गोला-बारूद, रडार, ड्रोन और नेविगेशन सिस्टम के लिए दूसरों पर निर्भर रहता है, तो उसकी रणनीतिक और सैन्य स्वायत्तता सीमित हो जाती है। हम इस स्थिति को पूरी तरह बदल रहे हैं। उन्होंने आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि साल 2013-14 में भारत का रक्षा निर्यात महज 686 करोड़ था, जो वित्त वर्ष 2025-26 में ऐतिहासिक उछाल के साथ 38,000 करोड़ से अधिक हो गया है।