टीएमसी के बागियों को बिना फैसला बुलाने का विरोध
अभी तो फैसला भी नहीं हुआ है
यह वॉक आउट प्रतीकात्मक ही रहा
राम मंदिर और पेपर लीक मुख्य मुद्दा
राष्ट्रीय खबर
नईदिल्लीः संसद के मानसून सत्र से पहले सरकार द्वारा बुलाई गई पारंपरिक सर्वदलीय बैठक में रविवार को उस समय भारी राजनीतिक ड्रामा देखने को मिला, जब पूरे विपक्ष ने एकजुट होकर बैठक से वॉकआउट कर दिया। हालांकि, यह बहिष्कार प्रतीकात्मक था और कुछ ही मिनटों के विरोध के बाद विपक्षी नेता दोबारा चर्चा की मेज पर लौट आए। विपक्ष तृणमूल कांग्रेस के बागी सांसदों द्वारा बनाए गए नए गुट नेशनलिस्ट सिटीजन्स पार्टी ऑफ इंडिया को बैठक में आमंत्रित किए जाने का विरोध कर रहा था। अभी तक लोकसभा अध्यक्ष ने इस पर अपना फैसला नहीं सुनाया है।
गौरतलब है कि जून महीने में ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस के करीब 20 बागी सांसदों ने रातों-रात एनसीपीआई में विलय कर लिया था। विपक्ष ने इस आमंत्रण पर कड़ा ऐतराज जताते हुए आरोप लगाया कि सरकार संसद में विपक्ष की आवाज दबाने के लिए ऐसा कर रही है।
सौगत राय तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ सांसद सौगत राय ने सरकार के इस फैसले पर तीखे सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा, हमारी मुख्य चिंता यह है कि एक ऐसी गैर-मान्यता प्राप्त पार्टी को बैठक में बुलाया गया, जिसका नाम अभी तक संसद की आधिकारिक वेबसाइट पर भी दर्ज नहीं है। गौरतलब है कि संसद की वेबसाइट पर अभी भी इन सभी 20 बागी सांसदों को तृणमूल कांग्रेस का ही सदस्य दिखाया जा रहा है।
इस मुद्दे पर कांग्रेस के मीडिया प्रभारी ने भी सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार द्वारा एनसीपीआई को बैठक में बुलाना लोकतांत्रिक मर्यादाओं के खिलाफ है। उन्होंने इस नई पार्टी को बागी सांसदों के लिए महज एक पार्किंग प्लेस करार दिया और कहा कि जब तक लोकसभा अध्यक्ष (स्पीकर) इस विलय पर कोई अंतिम फैसला नहीं ले लेते, तब तक इन्हें मान्यता नहीं दी जा सकती। राज्यसभा में विपक्ष के उपनेता प्रमोद तिवारी ने भी इस कदम की निंदा की। इस वॉकआउट में कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, समाजवादी पार्टी,जेएमएम, आम आदमी पार्टी और वामपंथी दलों समेत लगभग सभी प्रमुख विपक्षी दल शामिल रहे।
विपक्ष के आरोपों का जवाब देते हुए केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने सरकार के रुख को स्पष्ट किया। उन्होंने कहा, सरकार का यह कर्तव्य है कि वह सभी पक्षों को बैठक में आमंत्रित करे। चूंकि इन सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष से नई पार्टी के रूप में मान्यता मांगी है, इसलिए सरकार इन्हें नजरअंदाज नहीं कर सकती थी।
दूसरी तरफ, इस गुट की नेता डॉ. काकोली घोष दस्तीदार ने सर्वदलीय बैठक में शामिल होने का अवसर देने के लिए संसदीय कार्य मंत्री और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का आभार व्यक्त किया। तृणमूल से अलग सीटें आवंटित किए जाने के फैसले को उन्होंने सरकार का सकारात्मक कदम बताया। विलय को मान्यता मिलने के सवाल पर उन्होंने कहा कि इस तरह के फैसलों में कानूनी प्रक्रिया के तहत समय लगता है और वे जल्द ही सभी जरूरी दस्तावेज स्पीकर के समक्ष प्रस्तुत कर देंगे।
इन मुद्दों पर सरकार को घेरेगा विपक्ष संकेतात्मक बहिष्कार के बाद जब विपक्षी दल बैठक में वापस लौटे, तो उन्होंने मानसून सत्र के दौरान उठाए जाने वाले अपने मुद्दों की सूची सरकार के सामने रख दी।