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हजार सालों के हमलों बाद भी संकल्प अडिगः पीएम मोदी

सोमनाथ स्वाभिमान पर्व में कथन यह आत्मसम्मान का उत्सव

  • पूर्वजों ने अपना सबकुछ न्योछावर किया था

  • विदेशी हमलावर समझे थे वे जीत गये हैं

  • आज भी हमारा विजय पताका लहरा रहा है

पीआईबी

सोमनाथ: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को सोमनाथ मंदिर में पूजा-अर्चना करने और शौर्य यात्रा का नेतृत्व करने के बाद देश को संबोधित किया। अवसर था सोमनाथ स्वाभिमान पर्व का, जो साल 1026 ईस्वी में हुए आक्रमण के 1000 वर्ष और आजादी के बाद 1951 में मंदिर के पुनरुद्धार के 75 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित किया गया।

प्रधानमंत्री ने कहा कि यह आयोजन विनाश की याद में नहीं, बल्कि भारत की जिजीविषा और सभ्यतागत स्वाभिमान की हजार साल की यात्रा के सम्मान में है। उन्होंने भावुक होते हुए कहा, सोचिए, ठीक 1000 साल पहले इसी स्थान पर हमारे पूर्वजों ने महादेव और अपनी आस्था के लिए सर्वस्व न्योछावर कर दिया था। तब आक्रमणकारियों ने सोचा होगा कि उन्होंने हमें हरा दिया, लेकिन आज सोमनाथ मंदिर के शिखर पर लहराती ध्वजा पूरे ब्रह्मांड को भारत के सामर्थ्य की कहानी सुना रही है। प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा कि सदियों से सोमनाथ और भारतीय सभ्यता को बार-बार निशाना बनाया गया, लेकिन न तो सोमनाथ कभी नष्ट हुआ और न ही भारत।

प्रधानमंत्री ने सोमनाथ मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष के रूप में शौर्य यात्रा में भाग लिया। इस दौरान उन्होंने डमरू बजाकर श्रद्धालुओं का उत्साहवर्धन किया। यात्रा में गुजरात पुलिस की घुड़सवार इकाई के 108 घोड़े शामिल थे, जो अदम्य साहस और बलिदान का प्रतीक हैं।

इस चार दिवसीय उत्सव की भव्यता का वर्णन करते हुए पीएम ने बताया कि 1000 ड्रोन के जरिए सोमनाथ की विरासत का प्रदर्शन किया गया। 72 घंटे तक लगातार ओंकार जाप और मंत्रोच्चार किया गया। वीर हमीरजी गोहिल और सरदार वल्लभभाई पटेल की प्रतिमाओं पर पुष्पांजलि अर्पित की गई। वर्ष 2026 भारत के लिए दोहरे गौरव का वर्ष है।

11 मई 1951 को स्वतंत्र भारत में सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण के बाद इसे भक्तों के लिए खोला गया था।1 पीएम मोदी ने कहा कि 1951 का वह समारोह भारत के सांस्कृतिक पुनरुत्थान का प्रतीक था, और आज 75 वर्ष बाद यह अटूट विश्वास अरब सागर के तट पर और अधिक मजबूती से खड़ा है। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल और गृह राज्य मंत्री हर्ष सांघवी की उपस्थिति में हुए इस कार्यक्रम ने सोमनाथ को केवल एक धार्मिक स्थल के रूप में नहीं, बल्कि भारतीय लचीलेपन के एक वैश्विक प्रतीक के रूप में प्रस्तुत किया।