इराक और अफगानिस्तान भूल गये क्या
तेहरानः ईरान और अमेरिका के बीच जुबानी जंग एक बार फिर तेज हो गई है। हाल ही में ईरान में बढ़ती महंगाई, आर्थिक संकट और बदहाल सरकारी सेवाओं के खिलाफ शुरू हुए विरोध प्रदर्शनों ने हिंसक रूप ले लिया है। इन प्रदर्शनों में अब तक सुरक्षाबलों के साथ झड़प में कम से कम सात लोगों की मौत की खबर है, जिनमें प्रदर्शनकारी और सुरक्षाकर्मी दोनों शामिल हैं।
इस स्थिति पर प्रतिक्रिया देते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर ईरान को चेतावनी दी थी कि यदि ईरान शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों की हत्या करता है, तो अमेरिका मूकदर्शक बनकर नहीं बैठेगा। ट्रंप ने स्पष्ट संकेत दिए कि अमेरिका हस्तक्षेप के लिए पूरी तरह तैयार है।
ट्रंप की इस सैन्य धमकी का ईरान ने बेहद कड़े लहजे में जवाब दिया है। ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के वरिष्ठ सहायक अली शमखानी ने अमेरिका को अतीत की याद दिलाई। उन्होंने कहा कि अमेरिका को इराक और अफगानिस्तान से जिस तरह अपमानजनक तरीके से भागना पड़ा था, ईरान में हस्तक्षेप करने पर उसका अंजाम उससे भी बुरा होगा।
शमखानी ने जोर देकर कहा कि ईरान की राष्ट्रीय सुरक्षा एक ऐसी लक्ष्मण रेखा है, जिसे पार करना अमेरिका के लिए आत्मघाती साबित होगा। उन्होंने ट्रंप को सलाह दी कि वे दूसरों के मामले में नाक गलाने के बजाय अपने सैनिकों की सुरक्षा पर ध्यान दें।
ईरान का आरोप है कि इन प्रदर्शनों के पीछे वाशिंगटन का हाथ है। विशेष रूप से 1979 की इस्लामी क्रांति के दौरान सत्ता से बेदखल किए गए शाह मोहम्मद रजा पहलवी के पुत्र रजा पहलवी ने भी निर्वासन से इन प्रदर्शनों का समर्थन किया है। प्रदर्शनों के दौरान ‘शाह अमर रहें’ जैसे नारे लगने से तेहरान सरकार और अधिक सतर्क हो गई है।
ईरान का दावा है कि अमेरिका अपनी पुरानी नीति के तहत आंतरिक अशांति फैलाकर सत्ता परिवर्तन की कोशिश कर रहा है। गौरतलब है कि पिछले एक दशक में ईरान ने हिजाब विरोध और राजनीतिक स्वतंत्रता जैसे कई आंदोलनों को सख्ती से कुचला है और हर बार इन विद्रोहों के पीछे पश्चिमी ताकतों का हाथ होने का दावा किया है।