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साइबेरिया के सुदूर बर्फीले मैदानों में स्नोमैन

नासा के शक्तिशाली कैमरे ने अंतरिक्ष से देखा करिश्मा

वाशिंगटन: ब्रह्मांड की असीमित गहराइयों से हमारी पृथ्वी अक्सर किसी चित्रकार की कैनवास जैसी नजर आती है। हाल ही में अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के लैंडसैट 8 उपग्रह ने एक ऐसी ही विस्मयकारी तस्वीर साझा की है, जिसने वैज्ञानिकों और प्रकृति प्रेमियों का ध्यान अपनी ओर खींचा है। साइबेरिया के सुदूर उत्तर-पूर्वी हिस्से में स्थित चुकोटका प्रायद्वीप पर झीलों की एक पूरी श्रृंखला अंतरिक्ष से देखने पर एक विशालकाय स्नोमैन (बर्फ के पुतले) की आकृति बनाती नजर आ रही है।

अद्भुत प्राकृतिक बनावट और वैज्ञानिक कारण 16 जून 2025 को कैद की गई यह तस्वीर बिलिंग्स गांव और केप बिलिंग्स के पास स्थित है। यह आकृति किसी मानव द्वारा निर्मित कलाकृति नहीं, बल्कि हज़ारों वर्षों से चली आ रही जटिल भूगर्भीय प्रक्रियाओं का एक अनूठा परिणाम है। साइबेरिया के इस हिस्से में पर्माफ्रॉस्ट (स्थायी रूप से जमी हुई जमीन) पाई जाती है, जिसकी सतह के नीचे बर्फ की विशाल फांकें, जिन्हें आइस वेजेस कहा जाता है, दबी होती हैं।

गर्मियों के दौरान जब ऊपरी सतह का तापमान थोड़ा बढ़ता है, तो ये बर्फ की फांकें पिघलने लगती हैं। इसके परिणामस्वरूप ऊपर की मिट्टी धंस जाती है और वहां उथले गड्ढे बन जाते हैं। समय के साथ इनमें पिघला हुआ पानी भर जाता है और ये थर्मोकार्स्ट झीलें बन जाती हैं। वैज्ञानिकों का मानना है कि इस क्षेत्र में चलने वाली निरंतर हवाओं और लहरों के थपेड़ों ने इन झीलों को एक विशिष्ट अंडाकार दिशा में संरेखित कर दिया, जिससे ऊपर से देखने पर यह पांच खंडों वाले एक पूर्ण स्नोमैन जैसा दिखने लगा। यह प्राकृतिक संरचना लगभग 22 किलोमीटर लंबी है। यदि इसकी तुलना इंसानों द्वारा बनाए गए दुनिया के सबसे ऊंचे स्नोमैन (जिसका रिकॉर्ड 2025 में बना) से की जाए, तो यह उससे लगभग 600 गुना बड़ा है।

इतिहास और खोज की दास्तां इस क्षेत्र का ऐतिहासिक महत्व भी उतना ही गहरा है जितना इसका प्राकृतिक सौंदर्य। इस स्थान का नाम कमोडोर जोसेफ बिलिंग्स के सम्मान में रखा गया है, जो एक ब्रिटिश मूल के नौसेना अधिकारी थे और रूसी साम्राज्य के लिए आर्कटिक सर्वेक्षण का नेतृत्व किया था। 1790 से 1794 के बीच बिलिंग्स और उनकी टीम ने एशिया और उत्तरी अमेरिका के बीच नॉरथ-ईस्ट पैसेज (उत्तर-पूर्वी मार्ग) की खोज के लिए साहसिक अभियान चलाए थे।

ऐतिहासिक वृत्तांत बताते हैं कि उस दौर में इन दुर्गम और जमा देने वाले क्षेत्रों में यात्रा करने के लिए स्थानीय चुक्ची जनजातियों द्वारा पाले गए रेनडियर ही सबसे भरोसेमंद सहारा थे। रेनडियर न केवल सैकड़ों किलो वजन खींचने में सक्षम थे, बल्कि वे घोड़ों या कुत्तों के विपरीत शून्य से नीचे के तापमान में खुद का पेट भरने के लिए बर्फ खोदकर लाइकन (काई) ढूंढ लेते थे। बिलिंग्स के इन अभियानों ने ही दुनिया को पहली बार यह पुख्ता जानकारी दी थी कि एशिया और अमेरिका महाद्वीप एक जलडमरूमध्य के माध्यम से एक-दूसरे से अलग होते हैं। आज नासा की यह नई तस्वीर उसी ऐतिहासिक भूमि की एक आधुनिक और कलात्मक झलक प्रस्तुत करती है।