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इंसान की सातवीं इंद्रिय का भी पता चला

तो क्या हमें अब तक गलत जानकारी मिली हुई थी

  • हममें से हर किसी ने इसे महसूस किया है

  • क्रमिक विकास के तहत इसका विकास हुआ

  • भावी शोध कृत्रिम अंगों का विकास करेगा

राष्ट्रीय खबर

रांचीः सदियों से हमें पढ़ाया गया है कि इंसान के पास पांच इंद्रियां होती हैं: देखना, सुनना, सूंघना, स्वाद और स्पर्श। बाद में वैज्ञानिकों ने प्रोप्रियोसेप्शन यानी शरीर की स्थिति के बोध को छठी इंद्रिय माना। लेकिन आज की ताजा वैज्ञानिक रिपोर्ट ने रिमोट टच के रूप में सातवीं इंद्रिय की अवधारणा पेश की है।

वैज्ञानिकों ने पाया है कि मानव शरीर में एक सूक्ष्म इलेक्ट्रो-मैग्नेटिक फील्ड और विशेष तंत्रिका कोशिकाएं होती हैं जो बिना किसी भौतिक संपर्क के भी बाहरी उत्तेजनाओं को भांप लेती हैं। उदाहरण के तौर पर, जब कोई व्यक्ति आपके पीछे खड़ा होता है और बिना आपको छुए अपना हाथ आपकी गर्दन के पास लाता है, तो आपको एक अजीब सी सिहरन या उपस्थिति का अहसास होता है। अब तक इसे केवल एक मानसिक भ्रम माना जाता था, लेकिन नए शोध ने इसे सोमेटोसेंसरी इंटरैक्शन के रूप में परिभाषित किया है।

वायुमंडलीय दबाव और तापीय ऊर्जा: यह शोध बताता है कि हमारी त्वचा के पास मौजूद मेकैनो-रिसेप्टर्स न केवल दबाव को पहचानते हैं, बल्कि हवा के विस्थापन और सामने वाले शरीर से निकलने वाली सूक्ष्म तापीय ऊर्जा को भी पकड़ लेते हैं। एमआरआई स्कैन के दौरान देखा गया कि जब किसी वस्तु को शरीर के करीब (बिना छुए) लाया गया, तो मस्तिष्क का पैरिएटल लोब सक्रिय हो गया। यह वही हिस्सा है जो वास्तविक स्पर्श को प्रोसेस करता है।

वैज्ञानिकों का मानना है कि यह इंद्रिय हमारे पूर्वजों में शिकारियों से बचने के लिए विकसित हुई होगी। अंधेरे में या पीछे से होने वाले खतरों को बिना देखे या छुए भांप लेना एक जीवन रक्षक तंत्र की तरह काम करता था। इस खोज का सबसे बड़ा प्रभाव प्रोस्थेटिक्स (कृत्रिम अंगों) और रोबोटिक्स पर पड़ेगा। अगर हम कृत्रिम अंगों में इस सातवीं इंद्रिय को विकसित कर सकें, तो दिव्यांग व्यक्ति बिना किसी वस्तु को छुए उसकी दूरी और आकार का अंदाजा लगा पाएंगे। यह वर्चुअल रियलिटी की दुनिया को भी पूरी तरह बदल सकता है, जहाँ आप बिना किसी डिवाइस के डिजिटल चीजों को महसूस कर सकेंगे।

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