Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
Mandla Crime: मंडला में रिश्तों का कत्ल! पिता के साथ मिलकर बेटे ने की मां की हत्या, रोंगटे खड़े कर दे... Ishaan Khatter Video: रेस्टोरेंट से बाहर निकलते ही गिराई कॉफी, सफेद पैंट हुई खराब तो पैपराजी के सामन... NSA Ajit Doval Riyadh Visit: अजीत डोभाल ने रियाद में सऊदी विदेश मंत्री और क्राउन प्रिंस के करीबियों ... Bank Holiday Today: अक्षय तृतीया के बाद आज भी बंद रहेंगे बैंक? जानें 20 अप्रैल को किन राज्यों में रह... Motorola Edge 70 Pro Launch: 22 अप्रैल को लॉन्च होगा मोटोरोला का नया फोन, 6500mAh बैटरी और 144Hz डिस... PBKS vs LSG: श्रेयस अय्यर ने छोड़े इतने कैच की टोपी से छिपाना पड़ा मुंह, शर्मिंदगी का VIDEO सोशल मीड... Chardham Yatra 2026: अक्षय तृतीया के शुभ योग में शुरू हुई चारधाम यात्रा; जानें केदारनाथ-बद्रीनाथ के ... Chatra News: चतरा में दर्दनाक हादसा, तालाब में डूबने से मां और दो बेटियों की मौत; चंद मिनट में उजड़ ... Police Action: SP की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के दौरान हंसना ASI को पड़ा भारी, अनुशासनहीनता के आरोप में ... Postmaster Suicide: सट्टे के कर्ज में डूबे पोस्टमास्टर ने दोस्त के घर दी जान, लेनदारों के दबाव में ख...

मदुरै की पहाड़ी पर बने दीपस्तंभ का विवाद और उलझा

वक्फ बोर्ड का दावा यह दरगाह की संपत्ति है

  • सरकार का दावा यह जैनियों का है

  • वक्फ बोर्ड ने कहा इसकी मध्यस्थता हो

  • दीप जलाने के लेकर राजनीतिक विवाद

राष्ट्रीय खबर

चेन्नईः मद्रास उच्च न्यायालय की मदुरै पीठ में तिरुपरनकुण्ड्रम पहाड़ी पर स्थित एक प्राचीन पत्थर के स्तंभ, जिसे दीपथून कहा जाता है, के स्वामित्व को लेकर कानूनी बहस तेज हो गई है। मंगलवार को सुनवाई के दौरान तमिलनाडु वक्फ बोर्ड ने दावा किया कि 1923 के एक ऐतिहासिक अदालती फैसले के अनुसार, यह स्तंभ और पहाड़ी की चोटी पर स्थित मस्जिद के आसपास का क्षेत्र मुस्लिम समुदाय की संपत्ति है। वक्फ बोर्ड ने अदालत के समक्ष प्रस्ताव रखा कि इस संवेदनशील धार्मिक मुद्दे को अदालत की निगरानी में मध्यस्थता के जरिए सुलझाया जा सकता है।

अदालत का रुख और याचिकाकर्ताओं की आपत्ति जस्टिस जी. जयचंद्रन और जस्टिस के.के. रामकृष्णन की खंडपीठ उन अपीलों पर सुनवाई कर रही थी, जो जस्टिस जी.आर. स्वामीनाथन के पूर्व के आदेश के खिलाफ दायर की गई हैं। जस्टिस स्वामीनाथन ने सिकंदर बादशाह दरगाह के पास स्थित इस स्तंभ पर कार्तिकेय दीपम जलाने की अनुमति दी थी। जब अदालत ने याचिकाकर्ता एम. अरासुपंडी के वकील एस. गुरु कृष्णकुमार से मध्यस्थता की संभावना पर सवाल किया, तो उन्होंने इसे सिरे से खारिज कर दिया। वकील ने तर्क दिया कि मध्यस्थता की प्रक्रिया से मामले में अनावश्यक देरी होगी, जबकि हिंदू श्रद्धालु लंबे समय से अपने अधिकारों की प्रतीक्षा कर रहे हैं।

संपत्ति और पहुंच का कानूनी पेच वक्फ बोर्ड की ओर से पेश वकील आर. अब्दुल मुबीन ने तर्क दिया कि 1923 के आदेश और प्रिवी काउंसिल के फैसलों के अनुसार, पहाड़ी की चोटी पर बनी मस्जिद और उससे जुड़ी संरचनाएं मुसलमानों की हैं। उन्होंने दावा किया कि विवादित स्तंभ (दीपथून) तक पहुंचने का कोई स्वतंत्र रास्ता नहीं है और वहां केवल दरगाह के भीतर से होकर ही पहुंचा जा सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि जिन सीढ़ियों का उपयोग किया जाता है, वे दरगाह की संपत्ति हैं। बोर्ड का कहना है कि सीढ़ियों पर चढ़ना मुद्दा नहीं है, लेकिन यदि इसका उद्देश्य वहां दीप जलाना है, तो यह उनके अधिकारों का उल्लंघन होगा।

प्रशासनिक चिंताएं और सांप्रदायिक सौहार्द दूसरी ओर, मदुरै कलेक्टर और पुलिस आयुक्त का प्रतिनिधित्व कर रहे वरिष्ठ वकील विकास सिंह ने एकल न्यायाधीश (जस्टिस स्वामीनाथन) के आदेश की आलोचना की। उन्होंने कहा कि इस आदेश ने देश भर में यह गलत धारणा बनाई है कि तमिलनाडु सरकार हिंदुओं के खिलाफ है, जिससे सांप्रदायिक सद्भाव को खतरा पैदा हुआ है।

उन्होंने दलील दी कि प्रशासन को यह विकल्प दिया जाना चाहिए था कि दीपम पहाड़ी पर कहीं और जलाया जा सके। वहीं, याचिकाकर्ता के वकीलों ने सरकार पर पक्षपात का आरोप लगाते हुए कहा कि जब मुस्लिम श्रद्धालुओं को मंदिर के रास्ते सीढ़ियों तक जाने की अनुमति है, तो हिंदू भक्तों को कुछ सीढ़ियां चढ़ने से रोकना अनुचित है। अदालत ने इस मामले की अगली सुनवाई बुधवार तक के लिए टाल दी है।