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सम्राट चौधरी की कुर्सी पर मंडरा रहा संकट

बिहार में नये मंत्रिमंडल के गठन पर माथापच्ची का दौर

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः बिहार विधानसभा चुनाव में एनडीए की शानदार जीत के बाद राज्य में नई सरकार के गठन की प्रक्रिया तेज हो गई है। चुनाव से पहले हुए सीट-बंटवारे के समझौते के अनुसार, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और जनता दल यूनाइटेड (जदयू) ने 101-101 सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे।

नतीजतन, नई कैबिनेट में दोनों दलों को लगभग बराबर संख्या में मंत्री पद मिलने की संभावना है। इधर विवादों में घिरने तथा जनसुराज पार्टी के आरोपों की वजह से सम्राट चौधरी बहुत फिसलन वाली जमीन पर खड़े हैं। पार्टी के अंदर भी लोग मानते हैं कि इस बार उन्हें फिर से उप मुख्यमंत्री बनाये जाने की उम्मीद बहुत कम है।

गठबंधन के अन्य सहयोगी दलों को भी उनके प्रदर्शन के आधार पर मंत्रिमंडल में जगह मिलेगी। सूत्रों के अनुसार, चिराग पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) को दो, जीतन राम मांझी की हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (सेक्युलर) को एक और उपेंद्र कुशवाहा की राष्ट्रीय लोक मोर्चा को एक मंत्री पद मिल सकता है।

सरकार गठन को लेकर घटक दलों के बीच चर्चाएँ अंतिम चरण में हैं। वर्तमान बिहार विधानसभा का कार्यकाल 22 नवंबर को समाप्त हो रहा है। आज (मंगलवार) जदयू की बैठक के बाद, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार राज्यपाल को अपना इस्तीफा सौंप चुके हैं। नीतीश कुमार के रिकॉर्ड दसवीं बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने की उम्मीद है। हालाँकि, उपमुख्यमंत्री पद पर अभी भी अनिश्चितता बनी हुई है। मौजूदा उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नाम पर संशय बरकरार है। उनके नामांकन पत्र में कथित अनियमितताओं और उन पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों के कारण उन्हें दोबारा यह पद मिलेगा या नहीं, इस पर अंतिम फैसला होना बाकी है।

गठबंधन की जीत में, 243 सीटों वाली विधानसभा में भाजपा ने 89 सीटें जीतीं, जबकि जदयू ने 85 सीटें हासिल कीं। 2020 के पिछले चुनाव में, भाजपा ने 74 और जदयू ने 43 सीटें जीती थीं, जिसके परिणामस्वरूप भाजपा के 22 और जदयू के 12 मंत्री थे। सीटों की संख्या में बदलाव के साथ, इस बार मंत्री पदों का समीकरण भी बदल रहा है। माना जा रहा है कि नई सरकार का शपथ ग्रहण समारोह पटना के गांधी मैदान में हो सकता है, जहाँ 2015 में भी नीतीश कुमार ने शपथ ली थी।