Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
🚨 लातूर के औसा में स्कूल में वीडियो बनाने पर CJP संस्थापक अभिजीत दीपके पर FIR दर्ज लखनऊ KGMU में MBBS इंटर्न्स की भूख हड़ताल: ₹12,000 से बढ़ाकर ₹30,000 स्टाइपेंड करने की मांग, गेट पर ... बेंगलुरु के डोड्डाबल्लापुर में बड़ी कार्रवाई: पाकिस्तान स्थित गैंग से जुड़े 28 वर्षीय AC टेक्नीशियन ... बीजेपी की नई राष्ट्रीय टीम की पहली बैठक: वंदे मातरम् पर देशव्यापी अभियान का ऐलान, Gen Z से जुड़ेंगे ... जयपुर में जर्जर स्कूल पर एक्शन: पुराने भवन से 50 मीटर दूर ग्रामीण के मकान में शिफ्ट हुई कक्षाएं, 16 ... संभाजीनगर ट्रिपल डेथ केस: आईफोन की जिद या कोई और वजह? DCP रत्नाकर नवले बोले- जांच पूरी होने तक अफवाह... बिहार के DMCH में अमानवीयता की हद: गार्ड ने टूटे पैर वाले लावारिस मरीज को जमीन पर घसीटा, अधीक्षक ने ... 71 की उम्र में मेगास्टार चिरंजीवी का बॉक्स ऑफिस पर दबदबा, संक्रांति 2027 पर रिलीज होगी 'काका' पहलगाम हमले के मास्टरमाइंड हाफिज सईद पर NIA का शिकंजा: लाहौर भेजा जाएगा समन, गैर-मौजूदगी में चलेगा ट... 'मर्द औरतों को कंट्रोल क्यों करना चाहते हैं?': राहुल गांधी ने पुणे में छात्राओं से किया सीधा संवाद, ...

भारत नहीं सौंपेगा शेख हसीना को

बांग्लादेश की मांग पर भारत सरकार का स्पष्ट रवैया

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के प्रमुख मोहम्मद यूनुस द्वारा पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के प्रत्यर्पण की मांग और एक बांग्लादेशी न्यायाधिकरण के एकतरफा फैसले के बावजूद, यह स्पष्ट है कि भारत सरकार उन्हें बांग्लादेश को नहीं सौंपेगी। भारत ने हमेशा अपने मित्र देशों और नेताओं को समर्थन दिया है और दिसंबर 2024 में बांग्लादेश की ओर से औपचारिक मांग आने के बाद भी हसीना को सुरक्षित रखा है।

न्यायाधिकरण के फैसले के बाद भारत सरकार ने सोमवार को जो आधिकारिक बयान जारी किया, उसमें भी इस संवेदनशील मुद्दे पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी गई। विशेषज्ञ मानते हैं कि यह मामला आपराधिक से अधिक राजनीतिक प्रकृति का है, और यही वह आधार है जो भारत को प्रत्यर्पण न करने का मजबूत पक्ष प्रदान करता है।

बांग्लादेश, 2013 में हस्ताक्षरित प्रत्यर्पण संधि (जिसे 2016 में संशोधित किया गया था) का हवाला देते हुए हसीना को सौंपने की मांग कर रहा है। यह संधि दोनों देशों के बीच अपराधियों के आदान-प्रदान की शर्तें निर्धारित करती है। हालाँकि, संधि में स्पष्ट प्रावधान हैं जिनके तहत भारत प्रत्यर्पण से इनकार कर सकता है।

राजनीतिक अपराध का आधार (अनुच्छेद 6): संधि के अनुसार, यदि अपराध को राजनीतिक माना जाता है, तो भारत प्रत्यर्पण से मना कर सकता है। हालाँकि, हत्या, नरसंहार और मानवता के विरुद्ध अपराध इस धारा के अपवाद हैं। चूंकि अंतर्राष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण ने हसीना को इन गंभीर आरोपों में दोषी ठहराया है, इसलिए भारत सीधे तौर पर पूरे मामले को केवल राजनीतिक नहीं कह सकता।

इसके अलावा यदि अभियुक्त की जान को खतरा हो, या यह साबित हो जाए कि निष्पक्ष सुनवाई नहीं हुई, या न्यायाधिकरण का उद्देश्य न्याय के बजाय राजनीतिक बदला लेना है, तो भारत प्रत्यर्पण से इनकार कर सकता है। संयुक्त राष्ट्र द्वारा न्यायाधिकरण के गठन, न्यायाधीशों की नियुक्ति और प्रक्रियाओं पर पहले ही सवाल उठाए जा चुके हैं। शेख हसीना को अपना बचाव करने के लिए वकील न मिलना और न्यायधीशों पर सरकारी दबाव की खबरें भी भारत के पक्ष को मजबूत करती हैं।

यह स्थिति भारत-बांग्लादेश के कूटनीतिक संबंधों में तनाव बढ़ा सकती है, लेकिन चूंकि बांग्लादेश व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति जैसी कई महत्वपूर्ण चीजों के लिए भारत पर निर्भर है, इसलिए संबंधों का टूटना मुश्किल है। हालांकि, यूनुस सरकार द्वारा चीन और पाकिस्तान से नजदीकियां बढ़ाने जैसे रणनीतिक बदलाव भारत के लिए पूर्वोत्तर और बंगाल की खाड़ी में नई चुनौतियाँ पैदा कर सकते हैं।