मेरे साथ हो तो सब गुनाह माफ है लेकिन अपने मेरी ही बिल्ली मेरे ऊपर म्याउं करने लगे तो किसे अच्छा लगता है। जब तक पर्यावरण, इंजीनियरिंग और समाज के प्रति बातें करते थे, बेचारे बहुत अच्छे आदमी थे। मोटा भाई का दिमाग तो तभी ठनका था जब उन्होंने चीन द्वारा लद्दाख की जमीन पर कब्जा करने की बात कह दी थी।
एक तरफ तो प्रचार था कि लाल आंखें दिखाकर चीन को धमकाया गया है तो दूसरी तरफ से जमीनी हकीकत बयां कर सोनम वांगचुक ने सीधे सरकार यानी भाजपा के चाणक्य को ही नाराज कर लिया था। ऐसे में जो होना था वही हुआ और पर्यावरणविद अब जोधपुर जेल की हवा खा रहे हैं।
टटोलने के पता चलता है कि असली नाराजगी तो भाजपा कार्यालय में आग लगाने को लेकर है। बाकी सरकारी कार्यालय जल गये तो वह सरकारी माल था। पहले से ही प्रशांत किशोर जैसे लोग लगातार यह सवाल पूछ ऱहे हैं कि भाजपा के पास देश के हर जिला में आलीशान मकान बनाने का पैसा आखिर कहां से आया। इसके बीच ही लद्दाख में कार्यालय का जल जाना तकलीफ देने वाली बात तो है।
नतीजा है कि अब पुलिस के अलावा भाजपा के अंधभक्त भी पानी पीकर उन्हें गालियां दे रहे हैं और एक तस्वीर शेयर कर दुनिया को यह बता रहे हैं कि वह व्यक्ति कांग्रेसी पार्षद है, जो लद्दाख की हिंसा भड़काने में शामिल था। बेचारे वांगचुक ने इस आरोप की भी हवा निकाल दी और कहा कि कांग्रेसी पार्षद दूसरे व्यक्ति हैं और जिनकी तस्वीर शेयर की गयी है, वह कोई दूसरा व्यक्ति है।
लगातार अपनी ही बात को सही ठहराने की आदत जिनलोगों को पड़ी हुई है, उन्हें यह बात कैसे हजम होती। सरकारी बयान से पहले ही व्यक्ति की तस्वीर के साथ सारी सूचना प्रसारित करने वाले अंधभक्त भी नाराज हो गये क्योंकि सोशल मीडिया पर उनकी प्रचार की हवा ही निकल गयी। वैसे सोशल मीडिया पर एक बदलाव साफ दिख ऱहा है कि अब इस किस्म के गैर जिम्मेदार पोस्ट पर प्रतिकूल प्रतिक्रियाएं अधिक आने लगी है।
पता नहीं आपलोगों ने ध्यान दिया है अथवा नहीं, अनेक ऐसे अंधभक्त फेसबुक पर मौजूद हैं, जिन्होंने अपना चेहरा छिपा रखा है और पहचान छिपाये रखने की भरसक कोशिश कर रहे हैं। यह भी हाल के दिनों का बड़ा बदलाव है और वोट चोरी का आरोप दिनोंदिन मजबूत होते जाने के बाद अनेक ऐसे लोगों को भी भविष्य का भय सता रहा है।
इसी बात पर फिल्म दिल ही तो हैं का यह गीत याद आने लगा है। इस गीत को लिखा था साहिर लुधियानवी ने और
संगीत में ढाला था रोशन ने। इसे मुकेश कुमार ने अपना स्वर प्रदान किया था। गीत के बोल कुछ इस तरह हैं
तुम अगर मुझको न चाहो तो कोई बात नहीं
तुम किसी और को चाहोगी तो मुश्किल होगी
अब अगर मेल नहीं है तो जुदाई भी नहीं
बात तोड़ी भी नहीं तुमने बनाई भी नहीं
ये सहारा भी बहुत है मेरे जीने के लिये
तुम अगर मेरी नहीं हो तो पराई भी नहीं
मेरे दिल को न सराहो तो कोई बात नहीं
गैर के दिल को सराहोगी, तो मुश्किल…
तुम हसीं हो, तुम्हें सब प्यार ही करते होंगे
मैं तो मरता हूँ तो क्या और भी मरते होंगे
सब की आँखों में इसी शौक़ का तूफ़ां होगा
सब के सीने में यही दर्द उभरते होंगे
मेरे ग़म में न कराहो तो कोई बात नहीं
और के ग़म में कराहोगी तो मुश्किल…
फूल की तरह हँसो, सब की निगाहों में रहो
अपनी मासूम जवानी की पनाहों में रहो
मुझको वो दिन न दिखाना तुम्हें अपनी ही क़सम
मैं तरसता रहूँ तुम गैर की बाहों में रहो
तुम अगर मुझसे न निभाओ तो कोई बात नहीं
किसी दुश्मन से निभाओगी तो मुश्किल…
लेकिन भाई साहब माहौल बदल रहा है, इसे महसूस करने के लिए रॉकेट साइंस का वैज्ञानिक होना जरूरी नहीं है। सोशल मीडिया पर जिस तरीके से लोग भाजपा के प्रचार पर टिप्पणी कर रहे हैं, उससे साफ है कि अब खाली मैदान में गोल दागने की परिस्थिति नहीं रही। वोट चोरी का आरोप चर्चा में आने के बाद से गाहे बगारे जहां तहां वोट चोर गद्दी छोड़ का नारा लग रहा है।
चुनावी राज्य बिहार में तो कई मंत्री जनता द्वारा खदेड़े गये हैं। ऐसे में पता नहीं कब मामला और बिगड़ जाए। बेचारे चाणक्य खुद तब हैरान हो गये जब उनकी ही जनसभा में वोट चोरी का शोर गूंज गया। बात को संभालते तक तो यह फिल्म जनता तक रिलीज हो चुकी थी। अब ऐसे लोगों से कौन यह सवाल करें कि भाई जो वादा पहले किया था, उन्हें निभाने में क्या दिक्कत आ रही है। लद्दाख वाले तो पैदल चलकर दिल्ली तक आये थे। आप खुद जाओ और बैठकर बात करो वरना इस किस्म का खदेड़ा तो अब तेज होता जाएगा।