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मलेशिया से आतंकवाद और द्विपक्षीय संबंधों पर बयान

दो दिवसीय यात्रा पूरी कर भारत लौट गये भारतीय प्रधानमंत्री

  • आर्थिक और तकनीकी सहयोग की नई दिशा

  • वहां भी यूपीआई का विस्तार शीघ्र होगा

  • सांस्कृतिक दूत और आर्थिक भविष्य

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया मलेशिया यात्रा ने दक्षिण-पूर्व एशिया में भारत की एक्ट ईस्ट पॉलिसी को एक नई ऊंचाई प्रदान की है। कुआलालंपुर में आयोजित एक विशाल प्रवासी भारतीय सम्मेलन को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने न केवल सांस्कृतिक संबंधों को याद किया, बल्कि वैश्विक मंच से सुरक्षा और आतंकवाद पर भारत का कड़ा रुख भी स्पष्ट किया।

प्रधानमंत्री ने आतंकवाद को मानवता का सबसे बड़ा दुश्मन बताते हुए जीरो टॉलरेंस की नीति को दोहराया। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय को कड़ा संदेश देते हुए कहा कि आतंकवाद पर दोहरा मापदंड अपनाना पूरी दुनिया की शांति के लिए आत्मघाती साबित होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत अब आतंकवाद के विरुद्ध केवल बचाव नहीं, बल्कि निर्णायक कार्रवाई और वैश्विक सहयोग की नीति पर चल रहा है।

इस आधिकारिक यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय वार्ता का केंद्र तीन प्रमुख स्तंभ रहे: डिजिटल भुगतान, रक्षा सहयोग और सेमीकंडक्टर तकनीक। प्रधानमंत्री ने घोषणा की कि मलेशिया में जल्द ही भारतीय डिजिटल भुगतान प्रणाली यूपीआई का विस्तार किया जाएगा। यह कदम न केवल वहां रह रहे लाखों भारतीय प्रवासियों और छात्रों के लिए वित्तीय लेनदेन को सुगम बनाएगा, बल्कि दोनों देशों के बीच डिजिटल अर्थव्यवस्था के एकीकरण में मील का पत्थर साबित होगा।

रक्षा क्षेत्र में भारत की बढ़ती आत्मनिर्भरता का उल्लेख करते हुए, स्वदेशी तेजस लड़ाकू विमानों और अन्य अत्याधुनिक सैन्य उपकरणों की आपूर्ति पर उच्च स्तरीय चर्चा हुई। मलेशिया द्वारा भारत के रक्षा उत्पादों में दिखाई गई रुचि यह दर्शाती है कि भारत अब वैश्विक रक्षा बाजार में एक बड़े निर्यातक के रूप में उभर रहा है। इसके साथ ही, सेमीकंडक्टर और चिप निर्माण के क्षेत्र में मलेशिया के अनुभव और भारत की बढ़ती मांग को जोड़कर एक नया सप्लाई चेन तंत्र विकसित करने पर भी सहमति बनी।

मलेशिया में भारतीय मूल की बड़ी आबादी को भारत का गौरवशाली दूत बताते हुए प्रधानमंत्री ने उनके योगदान की सराहना की। उन्होंने कहा कि भारत आज दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने के मार्ग पर तेजी से अग्रसर है और इस विकास यात्रा में प्रवासी भारतीयों का भावनात्मक और आर्थिक जुड़ाव अत्यंत महत्वपूर्ण है। पाम तेल के व्यापारिक असंतुलन को दूर करने और नवीकरणीय ऊर्जा (विशेषकर ग्रीन हाइड्रोजन) में संयुक्त निवेश को लेकर भी महत्वपूर्ण समझौते हुए।

प्रधानमंत्री की यह यात्रा केवल कूटनीतिक औपचारिकता नहीं, बल्कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सुरक्षा और स्थिरता सुनिश्चित करने की दिशा में एक रणनीतिक कदम है। इससे भारत और मलेशिया के बीच सदियों पुराने सांस्कृतिक संबंधों को आधुनिक आर्थिक और तकनीकी साझेदारी में बदलने का ठोस आधार तैयार हुआ है।