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हिंदुओं की दरअसल चार श्रेणियां हैः भागवत

आरएसएस के कार्यक्रम में शामिल हुए अभिनेता सलमान खान

राष्ट्रीय खबर

मुंबईः राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने शनिवार को पहचान, समाज और राष्ट्रीय चरित्र पर विस्तार से चर्चा की और देश में हिंदुओं की चार व्यापक श्रेणियों का वर्णन किया। आरएसएस के 100 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में मुंबई में आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए भागवत ने कहा कि विश्व गुरु के रूप में भारत की भूमिका बयानबाजी से नहीं, बल्कि ऐसे आचरण से उभरेगी जो दुनिया के लिए उदाहरण पेश करे।

भागवत के अनुसार, पहली श्रेणी में वे लोग हैं जो अपनी पहचान को गर्व से स्वीकार करते हैं और कहते हैं, गर्व से कहो कि हम हिंदू हैं। दूसरी श्रेणी में वे लोग आते हैं जो पहचान तो स्वीकार करते हैं लेकिन गर्व की आवश्यकता पर सवाल उठाते हैं, वे कहते हैं, हाँ, हम हिंदू हैं, लेकिन इसमें गर्व करने वाली क्या बात है?

उन्होंने तीसरी श्रेणी का वर्णन करते हुए कहा कि ये लोग विवेकपूर्ण गोपनीयता पसंद करते हैं और कहते हैं, धीरे से कहो कि हम हिंदू हैं, अगर घर के अंदर पूछोगे, तो हम बता देंगे। चौथी श्रेणी में वे लोग शामिल हैं जो अपनी पहचान पूरी तरह से भूल चुके हैं या उन्हें भुला दिया गया है। उन्होंने टिप्पणी की कि ऐसे प्रयास जारी हैं जिससे अधिक से अधिक लोग अपनी पहचान भूल जाएं।

अपने संबोधन के दौरान भागवत ने कहा कि भारत का सभ्यतागत स्वरूप यहाँ के लोगों के भीतर पहले से ही निवास करता है। उन्होंने कहा कि जो कोई भी भारत का है, वह इस चरित्र को अपने भीतर समेटे हुए है, और देश के मुस्लिम व ईसाई भी इस सामूहिक अपनेपन का समान रूप से हिस्सा हैं। उन्होंने अपने पुराने विचार को दोहराया कि हिंदू शब्द को संज्ञा के रूप में नहीं, बल्कि एक विशेषण के रूप में समझा जाना चाहिए, और भारत में रहने वाला हर व्यक्ति इस परिभाषा में फिट बैठता है।

आरएसएस की भूमिका पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि संघ न तो सत्ता चाहता है और न ही लोकप्रियता। इसका एकमात्र उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि देश में चल रहे रचनात्मक कार्य प्रभावी ढंग से पूरे हों। उन्होंने संघ के संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार के सिद्धांतों को याद करते हुए कहा कि दो आदर्शों को कभी नहीं छोड़ना चाहिए: अपनी पढ़ाई में उत्कृष्टता प्राप्त करना और राष्ट्रीय जीवन में सक्रिय योगदान देना।

भागवत ने तर्क दिया कि आमतौर पर इस्तेमाल किया जाने वाला धर्मनिरपेक्षता शब्द भारत के लोकाचार को सटीक रूप से नहीं दर्शाता है। इसके बजाय, उन्होंने पंथ-निरपेक्षता का सुझाव दिया और कहा कि धर्म ही जीवन का आधार है। भागवत ने ये बातें नेहरू सेंटर, मुंबई में संघ यात्रा के 100 वर्ष: नए क्षितिज नामक दो दिवसीय व्याख्यान श्रृंखला के पहले दिन कहीं। इस कार्यक्रम में प्रसिद्ध फिल्म अभिनेता सलमान खान को भी दर्शक दीर्घा में उपस्थित देखा गया।