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तुलसीपीठ के जगदगुरु रामभद्राचार्य के बयान से राजनीति गरमायी

मायावती ने कहा जब जानकारी ना हो तो चुप रहना चाहिए

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की प्रमुख मायावती ने जगद्गुरु रामभद्राचार्य की डॉ. भीमराव अंबेडकर पर की गई टिप्पणी की कड़ी निंदा की है। हालांकि मायावती ने अपनी सोशल मीडिया पोस्ट में किसी का नाम नहीं लिया, लेकिन उनका इशारा साफ तौर पर रामभद्राचार्य की ओर था।

उन्होंने साधु-संतों को सलाह दी है कि अगर उन्हें अंबेडकर के योगदान के बारे में सही जानकारी नहीं है, तो उन्हें गलत बयानबाजी करने से बचना चाहिए। मायावती ने अपनी पोस्ट में लिखा कि कुछ साधु-संत, जो अक्सर सुर्खियों में बने रहने के लिए विवादित बयान देते रहते हैं, उन्हें बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर के भारतीय संविधान निर्माण में दिए गए अतुलनीय योगदान के बारे में शायद सही जानकारी नहीं है। ऐसे में उन्हें इस विषय पर कुछ भी गलत बोलने के बजाय चुप रहना ही बेहतर होगा।

मायावती ने आगे कहा कि इन लोगों को यह भी समझने की कोशिश करनी चाहिए कि बाबा साहेब के अनुयायी मनुस्मृति का विरोध क्यों करते हैं। उन्होंने यह भी सलाह दी कि ऐसे साधु-संतों को अपनी जातिवादी सोच को छोड़कर इस बात को समझना चाहिए।

उन्होंने यह भी कहा कि अंबेडकर एक महान और विद्वान व्यक्ति थे और जो लोग उन पर टिप्पणी करते हैं, उनकी विद्वत्ता अंबेडकर के सामने कुछ भी नहीं है। इसलिए, ऐसी बातें कहने से पहले उन्हें बचना चाहिए। यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ, जब रामभद्राचार्य ने एक इंटरव्यू में कहा था कि डॉ. अंबेडकर को संस्कृत नहीं आती थी और अगर आती, तो वे मनुस्मृति का अपमान नहीं करते।

जगद्गुरु रामभद्राचार्य अपने एक और बयान की वजह से भी विवादों में घिर गए हैं। उन्होंने हाल ही में पश्चिम उत्तर प्रदेश को मिनी पाकिस्तान जैसा बताया है। मेरठ में एक कथा के दौरान दिए गए उनके इस बयान पर समाजवादी पार्टी (सपा) और भाजपा दोनों की तरफ से प्रतिक्रियाएं आईं हैं। सपा नेता और पूर्व सांसद एसटी हसन ने उनके बयान पर सवाल उठाए हैं, जबकि भाजपा के यूपी प्रमुख भूपेंद्र सिंह ने भी इस पर अपनी राय रखी है। रामभद्राचार्य ने यह भी कहा कि भारत में हिंदुओं पर बहुत बड़ा संकट है।