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पंचतत्व में विलीन हुए झारखण्ड के गांधी दिशोम गुरु शिबू सोरेन

जबतक सूरज चांद रहेगा, शिबू तेरा नाम रहेगा के नारों से गूंजता रहा इलाका

  • रामगढ़ होते हुए सड़क पर हजारों खड़े थे

  • ठेकाकोचा के मुक्तिधाम में अंतिम संस्कार

  • उनकी मां का संस्कार भी यही हुआ था

मनोज मिश्र

नेमरा : जिन्होंने कभी भी अपने गांव की मिट्टी को नहीं भूल पाया आज उस गांव के हज़ारों ग्रामीणों के जुबान से यही निकल रहा था कि अब कोई शिबू सोरेन जैसा नेता नहीं बन पाएगा, जिन्होने कई झंझावतों को पार कर अलग झारखण्ड राज्य की स्थापना कराई, ऐसे सपूत को अंतिम जोहार करने की भीड़ उनके गांव नेमरा में थी।

हज़ारों नम आँखों के बीच झारखण्ड के गांधी स्मृतिशेष दिशोम गुरु शिबू सोरेन मंगलवार को पंचतत्व में विलीन हो गए। उनके पैतृक आवास रौ रौ गांव के नेमरा टोला के मुक्तिधाम में हज़ारों लोगों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी। शिबू सोरेन के पार्थिव शरीर को सड़क मार्ग से रांची से रामगढ़, गोला, बरलंगा होते हुए नेमरा लाया गया।

जिस वाहन से उन्हें नेमरा लाया जा रहा था, उसमें मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन बैठे थे। दिवंगत शिबू सोरेन के पार्थिव शरीर को उनके आवास के आंगन में रखा गया, जहां पारम्परिक रीतिरिवाज से अंतिम यात्रा के लिए उन्हें विदाई दी गई। पारम्परिक ढोल नगाड़ो और शहनाई की अंतिम विदाई की धुन के साथ शव यात्रा निकाली गई। घर से लगभग ग्यारह सौ गज की दूरी पर स्थित पंचाडू पहाड़ की तलहटी पर स्थित ठेकाकोचा नाला के मुक्तिधाम में अंतिम संस्कार किया गया। सीएम हेमंत सोरेन ने अपने पिता को मुखाग्नि दी।

चाहे सुख हो या दु:ख। हर घड़ी में शिबू सोरेन अपने परिवार और गांव वालों के साथ खड़े रहे। वे अपने गांव की मिट्टी को नहीं भूले। यही कारण है कि हर सुख दु:ख कार्यों में वे अपने पैतृक गांव नेमरा आते रहे।

1992 में शिबू सोरेन की माता जी का निधन हुआ था। तब वे माताजी जी के शव को दिल्ली से नेमरा लेकर आए थे और अंतिम संस्कार किया था।

ज्यादातर लोग तब से ही यह जानने लगे कि गुरु जी का पैतृक गांव नेमरा है। उससे पहले उनके नेमरा में पैतृक गांव होने की चर्चाएं होती थी। क्योंकि उन्होंने अपना ज्यादातर राजनीति समय दुमका क्षेत्र में बिताया।

माँ के बाद अपने चारों भाई दिवंगत राजाराम सोरेन, शंकर सोरेन, लालू सोरेन, पुत्र दुर्गा सोरेन सहित परिवार के अन्य दिवंगतों का उन्होंने नेमरा में अंतिम संस्कार किया।

सभी का अंतिम संस्कार नेमरा में हुआ। वहीं सभी की शादी, मुंडन, कुल पूजन सभी में उन्होने अपनी भागीदारी नेमरा पहुँचकर दिखाई। इसकी चर्चा क्षेत्र में वर्षों से होती है।

लोग कहते हैं कि आजकल तो लोग अपने गांव को भूलते जा रहे हैं। शिबू सोरेन का परिवार इसके लिए प्रेरणादायक है। लोगों का कहना है कि जब वे अपनी माटी को कभी नहीं भूले, तो आज उन्हें वह माटी, गांव के लोग कैसे भूल जाएंगे। वे अमर हो गए। इसी बीच नारा लगी।।।जबतक सूरज चांद रहेगा, शिबू तेरा नाम रहेगा।

शिबू सोरेन के पार्थिव शरीर को मंगलवार को विधानसभा में अंतिम दर्शन के बाद उनके पैतृक गांव नेमरा ले जाया गया। उनके अंतिम दीदार के लिए रांची से नेमरा तक लोगों ने बेसब्री से इंतजार किया।

गुरुजी के चाहने वाले सुबह से ही सड़क के किनारे मौजूद थे। नेमरा में अपने दिशोम गुरु को अंतिम विदाई देते वक्त सभी की आंखे छलक गईं।

इन नम आंखों को सहसा विश्वास ही नहीं हो रहा था कि गुरुजी हमारे बीच नहीं है। नेमरा में गुरुजी को अंतिम विदाई देने के लिए जन सैलाब उमड़ पड़ा।

नेमरा पहुंचने के बाद अंतिम विदाई से पहले पारंपरिक रीति रिवाजों को पूरा किया गया। वहां के ग्रामीणों ने फूल बरसाकर उन्हें अंतिम विदाई दी।

गुरुजी के अंतिम संस्कार में देश के दिग्गज नेता शामिल हुए। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे रांची एयरपोर्ट से सड़क मार्ग से नेमरा पहुंचे। इसके अलावा केंद्रीय मंत्री जुएल ओराम, अन्नपूर्णा देवी, टीएमसी सांसद डेरेक ओब्रायन और सांसद पप्पू यादव के अलावा अर्जुन मुंडा, सुदेश महतो, डीजीपी अनुराग गुप्ता सहित झारखंड के मंत्री-विधायक से लेकर कई गणमान्य लोग शामिल हुए।