Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
झारखंड में सावन के साथ मौसम ने बदली करवट, 40 से 50 km/h की रफ्तार से चलेंगी तेज हवाएं; वज्रपात का अल... रांची में संत शिरोमणि गुरु रविदास जी की 650वीं जयंती पर भव्य 'कलश वंदन यात्रा', पावन मिट्टी के दर्शन... धनबाद के चिरकुंडा में अवैध लॉटरी प्रिंटिंग यूनिट का भंडाफोड़, डेढ़ से दो करोड़ रुपये की टिकटें और मश... झारखंड में खात्मे की कगार पर लाल आतंक, सुरक्षा बलों ने नक्सलियों से वापस छीने 1000 से अधिक सरकारी हथ... धनबाद के बरोरा चेकपोस्ट पर ताबड़तोड़ दो राउंड फायरिंग, बाल-बाल बचा युवक; इलाके में दहशत रांची के अल्बर्ट एक्का चौक पर 35 दुकानों का 13 वर्षों से पेंडिंग है किराया, दुकानदारों ने खटखटाया हा... देवघर पहुंचे नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी, JPSC और JSSC धांधली पर राज्य सरकार को घेरा गढ़वा में कभी भी गिर सकता है बिरहा नदी का पुल, जान हथेली पर रखकर सफर करने को मजबूर हैं ग्रामीण रांची में ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन पर पुलिस का बड़ा चाबुक, जुलाई महीने में कटे 1.20 लाख चालान सावन की पहली सोमवारी पर रांची में सुरक्षा चाक-चौबंद: 500 जवान तैनात, पहाड़ी मंदिर का ट्रैफिक प्लान ब...

काशी के महाश्मशान पर चिता भस्म की होली

वाराणसी: भूत भावन भगवान शंकर यानी श्रीकाशी विश्वनाथ के माता गौरा की विदाई समारोह के बाद काशीवासियों को होली खेलने की बाबा से अनुमति क्या मिली कि काशी रंगोत्सव में सराबोर हो गई।

शनिवार को तीन सौ साल पुरानी चिता भस्म की होली की परम्परा को निभाने काशीवासियों का हुजूम महाश्मशान मर्णिकर्णिका घाट पर उमड़ पड़ा। धधकती चिताओं के बीच चिता भस्म की होली खेली। इस मौके पर सुरक्षा के कड़े प्रबंध किये गए थे।

ढोल-नगाड़े और डमरूओं के निनाद के बीच हजारों शिव भक्तों की टोलियां सुबह 11 बजे से महाश्मशान की ओर पहुंचने लगी। शिव के गण यक्ष, गंधर्व, किन्नर, औघड़ सब महाश्मशान पर चिताओं के भस्म की होली खेलने पहुंचे।

श्रीकाशी विश्वनाथ धाम के पास स्थित इस महाश्मशान पर इस ऐतिहासिक और पौराणिक मान्यताओं वाली विश्व की अनूठी होली को कैमरों के कैद करने की होड़ मच गई। शिव-पार्वती के स्वरूप के साथ पहुंचे भोलेनाथ के गणों ने चिताओं की भस्म से होली खेलनी शुरू कर दिया।

संगीत की धुनों पर थिरकते अड़भंगी के काशी के लोग चिता भस्म को शरीर पर लपेटे जा रहे थे। यह जानते हुए कि कल इसी भस्म में उनका शरीर भी तब्दील हो जाना है। अद्भुत और अलौकिक होली। आध्यात्म की गहराईयों का अहसास कराती यह होली दूर दराज के शवयात्रा में आये लोगों को अजीब भी लग रही थी।

आश्चर्य हो रहा था कि जहां लाशों के ढेर लगे हों, अपनों के खोने के गम में डूबे परिजन उनका अंतिम संस्कार कर रहे हैं। ऐसे में हंसना और नाचना कितना मुश्किल है और यहां तो उन्हीं चिताओं की भस्म लपेटकर लोग होली मना रहे हैं। मोक्ष की नगरी काशी में ही यह सम्भव है। ऐसा नजारा शायद ही कही देखने को मिले।

एक ओर मौत का मातम और दूसरी ओर होली की मस्ती। सबकुछ एक ही जगह और एक साथ। कोई भूत बनकर पहुंचा है तो कोई औघड़। किन्नर समाज भी नृत्य में मगन है।

काशी के साधु-संतों भी इस दिव्य होली में शामिल हुए। संगीत की धुनों पर काशीवासी नृत्य कर रहे थे, डमरूओं के निनाद गूंज रहे थे और रह-रहकर काशीपुराधिपति, महादानी भोलेनाथ की आध्यात्मिक होली पर पद्मविभूषण पंडित छन्नूलाल मिश्र के गाये गीत ‘खेले मसाने में होली दिगम्बर, भूत पिशाच बटोरी‘ पर भक्त मस्ती के सागर में गोते लगा रहे थे।

चिता भस्म की इस होली के आयोजक महाश्मशान नाथ मंदिर के अध्यक्ष चैनु प्रसाद गुप्ता, सतुआ बाबा आश्रम के महामंडलेश्वर संतोष दास, व्यवस्थापक गुलशन कपूर आदि व्यवस्था की कमान सम्भाले हुए थे।