Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
पिछले चार दशकों से डाक्टर और मरीज दोनों गलतफहमी में थे घने जंगलों के निवासियों का अपनी गुप्त संवाद तंत्र कायम है, देखें वीडियो Namo Bharat News: दिल्ली-मेरठ कॉरिडोर पर नमो भारत की 10 अतिरिक्त ट्रिप्स; अब और भी आसान होगा सफर असम में समान नागरिक संहिता विधेयक पास Border Security News: घुसपैठ और तस्करी पर नकेल; अमित शाह ने जिला अधिकारियों को सौंपी अहम जिम्मेदारी,... Modi Govt 12 Years: मोदी सरकार के केंद्र में 12 साल पूरे; भाजपा मनाएगी भव्य जश्न, 2047 का रोडमैप होग... अगले चुनाव में 33 फीसद सीट महिलाओं कोः  नारा लोकेश Ayushman Bharat Delhi: दिल्ली में 7.72 लाख से ज्यादा आयुष्मान कार्ड जारी; 10 लाख तक का मिल रहा कैशले... वामपंथी समर्थकों ने अफसरों पर हमला कर दिया Annapurna Bhandar Update: लक्ष्मी भंडार में गड़बड़ियों का दावा; बंगाल सरकार ने शुरू की नई स्कीम, जून स...

Sambhal Bakrid News: संभल मंडी में मंदी की मार; 50 हजार का बकरा 30 हजार में भी नहीं बिक रहा, व्यापारी परेशान

संभल: उत्तर प्रदेश के संभल जिले में इस बार बकरीद के मौके पर बकरा मंडी में कुछ अलग ही नजारा देखने को मिल रहा है। बाजार में अच्छी नस्ल और भारी-भरकम बकरे तो मौजूद हैं, लेकिन उन्हें खरीदने वाले ग्राहक नदारद हैं। आलम यह है कि 50 हजार की कीमत वाले बकरे अब 30 हजार रुपये में भी बेचने को तैयार हैं, लेकिन खरीदार नहीं मिल रहे, जिससे पशु व्यापारी भारी आर्थिक तंगी और निराशा के दौर से गुजर रहे हैं।

🐂 डिमांड और सप्लाई का असंतुलन

हयातनगर थाना क्षेत्र के सरायतरीन इलाके में रामा टॉकीज के पास लगी मंडी में इस बार बड़े बकरों की भारी आवक है। व्यापारियों का मानना है कि इस बार दिल्ली, मुंबई और अन्य महानगरों में अच्छे दाम मिलने की उम्मीद में कई बड़े व्यापारी अपने बकरे बाहर की मंडियों में ले गए। स्थानीय मंडी में जो बकरे बचे हैं, उनकी कीमतें 25 से 50 हजार रुपये के बीच हैं, जबकि ग्राहक 15 से 20 हजार रुपये से ऊपर खर्च करने की स्थिति में नहीं दिख रहे हैं।

💸 ग्राहकों की पहुंच से बाहर दाम

सबसे महंगी मानी जाने वाली ‘अजमेरी नस्ल’ के बकरे, जिनकी बाजार में कीमत 50 हजार रुपये तक है, वे भी अब 30 से 35 हजार रुपये में बिकने को तैयार हैं, लेकिन खरीदार सिर्फ भाव पूछकर वापस लौट रहे हैं। व्यापारियों का कहना है कि बकरों को चारे और देखभाल में जो लागत आई है, अब उसे निकालना भी दूभर हो गया है।

📊 महंगाई का चौतरफा असर

बकरीद पर छाई इस मंदी के पीछे मुख्य कारण बढ़ती महंगाई है। पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी का सीधा असर सब्जियों, फलों और दैनिक उपभोग की अन्य वस्तुओं पर पड़ा है। आम जनता का बजट पहले से ही डगमगाया हुआ है, जिसका सीधा असर अब त्यौहारों की खरीदारी पर भी दिख रहा है। बढ़ती महंगाई के कारण न केवल लोगों की खरीद क्षमता कम हुई है, बल्कि पशु व्यापारियों को भी इस साल भारी नुकसान का सामना करना पड़ रहा है।