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घने जंगलों के निवासियों का अपनी गुप्त संवाद तंत्र कायम है, देखें वीडियो

एक दूसरे को मौजूदगी बताते रहते हैं बाघ

  • गंध से अपनी उपस्थिति बताते हैं

  • इलाके को लेकर संवेदनशील होता है

  • एक दूसरे के इलाके में जाने पर संघर्ष

राष्ट्रीय खबर

भोपालः वे भले ही घने जंगलों में अकेले घूमते हुए बेहद शांत और एकाकी जीव नजर आएं, लेकिन असलियत यह है कि जंगल उनकी रहस्यमयी कूटभाषा और छिपे हुए संदेशों से भरे पड़े हैं। ये संदेश वे अपने प्रतिद्वंद्वियों, जीवनसाथी और वैज्ञानिकों के लिए छोड़ जाते हैं। एशिया के घने जंगलों और घास के मैदानों में रहने वाले बाघ बेहद स्वतंत्र और मजबूत क्षेत्रीय प्रवृत्ति वाले जीव हैं।

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वे अपनी सल्तनत घोषित करने और उसकी रक्षा के लिए गंध मार्किंग (सेंट मार्किंग), पेड़ों को खरोंचना, खास दहाड़ और अन्य शारीरिक संकेतों का इस्तेमाल करते हैं। यह गुप्त संवाद आपस में होने वाली खूनी झड़पों को टालने का काम करता है। चाहे सुंदरबन के दलदली जंगल हों, मध्य भारत के अभयारण्य हों या साइबेरिया के बर्फीले वन, जंगलों में अपनी बादशाहत तय करने का यह तरीका बाघों के अस्तित्व के लिए सबसे जरूरी हथियार है।

इलाके की जंग और केमिकल मैसेंजर एक शीर्ष शिकारी होने के नाते बाघ केवल संभोग या शावकों की परवरिश के समय को छोड़कर पूरी जिंदगी अकेले बिताना पसंद करता है। इसके लिए उन्हें एक बड़े इलाके की जरूरत होती है, जहां पर्याप्त शिकार, पानी और छिपने की जगह हो। वर्ल्ड वाइड फंड फॉर नेचर के अनुसार, एक बाघ का इलाका वहां भोजन की उपलब्धता पर निर्भर करता है।

एक नर बाघ का इलाका मादा की तुलना में काफी बड़ा होता है, जो अक्सर कई मादाओं के क्षेत्रों को आपस में जोड़ता है। बाघों द्वारा छोड़े गए ये सेंड मार्क वास्तव में सूचनाओं का खजाना होते हैं। इनमें बाघ की उम्र, लिंग, प्रजनन की स्थिति और उसकी सटीक पहचान तक छिपी होती है। वहां से गुजरने वाला कोई भी दूसरा बाघ इस गंध को सूंघकर तुरंत भांप लेता है कि इलाके का मालिक कोई आक्रामक नर है, मिलन के लिए तैयार मादा है या कोई नौजवान शावक।

पन्ना टाइगर रिजर्व की अनोखी दास्तां मध्य भारत के पन्ना टाइगर रिजर्व में तैनात वन रक्षकों और ट्रैकर्स ने गश्त के दौरान इस व्यवहार को बहुत करीब से देखा है। पानी के स्रोतों और बफर जोन के पास पेड़ों के तनों पर गहरे खरोंच के निशान, हवा में तैरती एक खास गंध और पगडंडियों पर बने पदचिह्न (पगमार्क) आसानी से बाघों की मौजूदगी की कहानी बयां कर देते हैं।

वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया द्वारा पन्ना में किए गए एक अध्ययन में बाघों के इस व्यवहार को एक बेहद खूबसूरत नाम दिया गया है—प्राकृतिक परिदृश्य पर लिखा गया रासायनिक विज्ञापन। यहां के ताकतवर नर बाघ अपने इलाके की सीमा की कड़ाई से निगरानी करते हैं और अपनी बादशाहत को नया बनाए रखने के लिए बार-बार उन्हीं रास्तों पर लौटकर अपनी गंध और खरोंचों को ताजा करते रहते हैं।