तीन हजार करोड़ के ऋण धोखाधड़ी मामले में हुई कार्रवाई
राष्ट्रीय खबर
नईदिल्लीः प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने अनिल अंबानी से जुड़े 3,000 करोड़ के ऋण धोखाधड़ी मामले में अपनी जांच तेज़ कर दी है, जिसकी पहली महत्वपूर्ण गिरफ्तारी बिस्वाल ट्रेडलिंक प्राइवेट लिमिटेड (बीटीपीएल) के प्रबंध निदेशक पार्थ सारथी बिस्वाल के रूप में हुई है। उन्हें शनिवार को धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के प्रावधानों के तहत हिरासत में लिया गया।
ईडी ने अपनी जांच में एक महत्वपूर्ण वित्तीय संबंध का खुलासा किया है: बीटीपीएल ने अनिल अंबानी के स्वामित्व वाली रिलायंस पावर लिमिटेड से कथित तौर पर 5.4 करोड़ रुपये प्राप्त किए थे। ये फंड फर्जी बैंक गारंटी के लिए प्राप्त किए गए थे। अधिकारियों का मानना है कि यह लेनदेन बीटीपीएल की धोखाधड़ी वाली गतिविधियों को सीधे अंबानी के कॉर्पोरेट नेटवर्क से जोड़ता है, जिससे यह धोखाधड़ी के जाल को समझने में एक महत्वपूर्ण सुराग बन गया है। यह विशेष रूप से इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह दर्शाता है कि कैसे छोटी कंपनियां बड़े कॉर्पोरेट दिग्गजों के साथ जुड़कर कथित तौर पर अवैध गतिविधियों को अंजाम दे सकती हैं।
यह गिरफ्तारी ईडी द्वारा अनिल अंबानी के खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी करने के ठीक एक दिन बाद हुई है। एक रिपोर्ट के अनुसार, एक सूत्र ने खुलासा किया है कि अंबानी को अब जांच अधिकारी की पूर्व अनुमति के बिना भारत छोड़ने की अनुमति नहीं है। यदि वह विदेश यात्रा करने का प्रयास करते हैं, तो उन्हें हवाई अड्डों या बंदरगाहों पर हिरासत में लिया जा सकता है। यह कदम ईडी की ओर से यह सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है कि अंबानी देश में रहें और जांच में सहयोग करें।
मामले की गंभीरता को देखते हुए, एजेंसी ने रिलायंस समूह के अध्यक्ष अनिल अंबानी को भी तलब किया है। उन्हें उनके समूह की कंपनियों के खिलाफ करोड़ों रुपये के कथित बैंक ऋण धोखाधड़ी से जुड़े धन शोधन मामले में 5 अगस्त को पूछताछ के लिए बुलाया गया है। यह समन दर्शाता है कि ईडी अंबानी की भूमिका और कथित धोखाधड़ी में उनकी कंपनियों की संलिप्तता की गहराई तक जाने के लिए तैयार है। यह जांच भारतीय बैंकिंग प्रणाली में एनपीए (गैर-निष्पादित परिसंपत्तियों) की बढ़ती समस्या के बीच हुई है, जहां बड़े कॉर्पोरेट ऋणों का डिफ़ॉल्ट होना एक प्रमुख चिंता का विषय रहा है।
कुल मिलाकर, इस मामले में ईडी की कार्रवाई से यह स्पष्ट होता है कि नियामक प्राधिकरण वित्तीय धोखाधड़ी और धन शोधन के खिलाफ अपनी कार्रवाई को तेज़ कर रहे हैं, विशेष रूप से उन मामलों में जहां बड़े कॉर्पोरेट समूह शामिल हैं। बिस्वाल की गिरफ्तारी और अनिल अंबानी के खिलाफ लुकआउट नोटिस और समन इस बात का संकेत है कि जांच एजेंसी इस मामले को पूरी गंभीरता से ले रही है और भविष्य में और भी गिरफ्तारियां और विस्तृत जांच संभव है।