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झारखंड में एक्जिट पोल की औपचारिकता पूरी की जा रही है

लोगों के मोबाइल पर आ रहे हैं लगातार फोन

  • सिर्फ तीन ऑप्सन पर बटन दबाना

  • असली मुद्दों पर कोई सवाल ही नहीं

  • लोगों ने भी इसे हल्के में ही लिया है

राष्ट्रीय खबर

 

रांचीः रांची में कौन से प्रत्याशी को आप वोट देने वाले हैं, के सवाल ने लोगों को मजाक का नया अवसर दे दिया है। अनेक लोगों को इस बारे में मोबाइल पर फोन आये हैं, जिसमें उन्हें अपनी पसंद के मुताबिक एक, दो या तीन नंबर का बटन दबाने को कहा गया है। अजीब स्थिति यह है कि लोग अपने मताधिकार को एक गोपनीय और निजी फैसला मानते हैं।

इसलिए कोई भी इस फोन का सही उत्तर नहीं दे रहा है। कुछ लोगों ने इसी प्रयास में तीन नंबर का बटन दबाया है, जिसका अर्थ है कि रांची विधानसभा के लिए वह भाजपा अथवा झामुमो के प्रत्याशी के बदले किसी अन्य के पक्ष में मतदान करेंगे।

पूरे घटनाक्रम से यह साबित हो जाता है कि किसी एजेंसी को इस एक्जिट पोल का आंकड़ा एकत्रित करने की जिम्मेदारी सौंपी गयी है।

यह एजेंसी भी पैसा बचाने के लिए लोगों ने निजी तौर पर मिलने के बदले फोन पर ही अपना काम चला रही है और सारा कुछ ऑटोमेशन के जरिए हो रहा है।

अंकित होने वाले बटन के आंकड़ों के आधार पर  ही मतदान के बाद एक्जिट पोल के नतीजे जारी किये जाएंगे। अभी से ही समझा जा सकता है कि इस कामचलाऊ तरीके से किये गये सर्वेक्षण का आंकड़ा किस स्तर पर सही होगा।

वैसे जानकार लोगों का मानना है कि जो सवाल पूछे जा रहे हैं, वे दरअसल जमीनी सर्वेक्षण का मुद्दा ही नहीं है। फोन पर ग्राहकों से जो सवाल पूछा जाता है, वह है कि अगर आप झामुमो को वोट देंगे तो एक नंबर का बटन दबाएं और अगर आपका वोट भाजपा को जाएगा तो दो नंबर का बटन दबाएं। तीन नंबर का बटन दबाने का अर्थ इन दोनों में से किसी को भी वोट नहीं देने का है।

इस किस्म के सर्वेक्षण की सबसे बड़ी गलती यह है कि इसमें एजेंसी को जमीनी हकीकत और चुनावी मुद्दों का आभाष तक नहीं हो पाता है। लिहाजा यह माना जा सकता है कि एक्जिट पोल का आंकड़ा जुटाने के नाम पर सिर्फ औपचारिकता पूरी करते हुए आंकड़ों को एकत्रित किया जा रहा है, जो जमीनी हकीकत से काफी अलग भी हो सकता है।

ऐसे एक्जिट पोल की जानकारी रखने वाले पत्रकारों के मुताबिक शायद किसी चैनल अथवा राजनीतिक दल ने किसी एजेंसी को यह जिम्मेदारी सौंपी है। जिसके लोग स्थानीय स्तर पर उपलब्ध मोबाइल नंबरों से यह आंकड़ा एकत्रित कर रहे हैं। सारा आंकड़ा एकत्रित होने के बाद पैसे देने वाली पार्टी को कितने लोगों से संपर्क साधा गया है, इसका विवरण देने के साथ साथ ऐसे लोगों के मोबाइल नंबर भी दिये जाएंगे। इसके बाद एजेंसी को अपने सर्वेक्षण के टेंडर का बाकी पैसा मिल पायेगा।