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कंप्यूटर वाले स्वचालित वाहन शीघ्र ही आ जाएंगे

  • इसके हार्डवेयर को उन्नत करना होगा

  • ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन पर ध्यान

  • ज्यादा कार्यकुशल होंगे ऐसे भावी वाहन

राष्ट्रीय खबर

रांचीः शीघ्र ही पूरी दुनिया में उन्नत श्रेणी के वैसे वाहन आ जाएंगे, जो कंप्यूटर तकनीक आधारित होंगे। इस दिशा में गाड़ी में इस्तेमाल होने वाले कंप्यूटर हार्डवेयर तैयार करने का काम भी प्रगति पर है। वैसे यह समझ लेना जरूरी है कि दुनिया में ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन को नियंत्रित करने की दिशा में प्रयास के तहत भी यह काम किया जा रहा है।

इस काम में जुटे वैज्ञानिकों का अनुमान है कि वर्ष 2050 तक इस दुनिया में 95 प्रतिशत वाहन इसी तकनीक पर आधारित हो जाएंगे। इससे ऊर्जा की खपत कम होने की वजह से पेट्रोलियम जनित प्रदूषण काफी कम किया जाएगा। वैसे इस मामले में इस बात पर विचार किया जा रहा है कि अत्यधिक कंप्यूटर हार्डवेयर के इस्तेमाल से ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन पर क्या कुछ प्रभाव होगा।

स्वचालित और जीपीएस आधारित वाहन पहले से ही बनाये जा चुके हैं। कई प्रतिष्ठित प्रतिष्ठानों में इन वाहनों का सीमित उपयोग भी किया जा रहा है। दूसरी तरफ कई कंपनियों कंप्यूटर तकनीक आधारित वाहनों के व्यापारिक इस्तेमाल पर भी परीक्षण कर रही है।

एमआईटी के शोध दल ने इस दिशा में ऊर्जा की खपत और उससे होने वाले ग्रीन हाउस गैस उत्सर्जन पर ध्यान केंद्रित किया है। इसी चुनौती को कम करने के लिए उन्नत श्रेणी के हार्डवेयर बनाने का काम चल रहा है ताकि एक तरफ से फायदा और दूसरे तरफ से पर्यावरण के नुकसान को कम किया जा सके।

वर्तमान कंप्यूटर तकनीक आधारित उपकरणों से अगर वाहनों का संचालन किया गया तो ग्रीन हाउस गैसों के मामले में कोई सुधार नहीं होगा। शोध दल का अनुमान है कि अगर दुनिया में एक खरब स्वचालित ऐसे वाहन सड़कों पर एक घंटा चलते हैं तो वे 840 वाट की दर से ऊर्जा की खपत की वजह से काफी ग्रीन हाउस गैसों का उत्सर्जन कर देंगे, जो पर्यावरण के लिहाज से अच्छी बात नहीं होगी।

शोध के तहत एक मॉडल तैयार कर यह भी पाया गया है कि हर तीन साल में पूरी दुनिया में कंप्यूटर आधारित कार्यों का बोझ दोगुणा हो रहा है। इसलिए उन्नत किस्म के कंप्यूटर हार्डवेयर की जरूरत है जो कम ऊर्जा में संचालित हो और ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन को कम कर सके।

शोध दल का मानना है कि ऐसे वाहनों के अंदर ही कंप्यूटर स्थापित होंगे। इस पद्धति के चालू होने के सड़क दुर्घटनाओं को कम किया जा सकेगा। पूर्व निर्धारित मापदंडों की वजह से ऐसे वाहन अत्यंत खतरनाक गति को कभी प्राप्त ही नहीं करेंगे। अगर वाहन पर बैठे लोग उसे ऐसा करने का निर्देश भी दे तो अपने साफ्टवेयर की वजह से वह इससे इंकार कर देगा।

इसके अलावा आम वाहन चालकों को झपकी आने अथवा निर्णय लेने में गलती करने तथा कई बार वाहन में बैठे दूसरे लोगों से बात चीत करने से होने वाले हादसों की बात इसमे पूरी तरह गायब हो जाएगी। क्योंकि कंप्यूटर इन इंसानी परेशानियों से पूरी तरह मुक्त होगा। सेंसर युक्त होने की वजह से वह काफी दूर से ही आने वाले वाहन का हाल चाल भांप लेगा तथा आम इंसानी नजर जिन चीजों को नहीं देख पाती है, वह इन्हें भी देखकर उसके हिसाब से गाड़ी चलायेगा।

एमआई के शोधकर्ता सौम्या सुधाकर ने इस पर पेश किये गये शोध प्रबंध का नेतृत्व किया है। इसमें बताया गया है कि यह सभी वाहन इलेक्ट्रिक वाहन होंगे और इनमें किसी इंसानी सहचालक की आवश्यकता नहीं होगी। लंबी दूरी के बड़े वाहनों की निरंतरता की वजह से भी कारोबारी लाभ होगा क्योंकि ऐसे ट्रक बिना विश्राम के लगातार अपने गंतव्य तक पहुंचेगे। शोध दल का मानना है कि इस तकनीक से इंसान के काम करने की क्षमता बढ़ेगी क्योंकि वाहन के चलते वक्त वह आराम से अपने दूसरे जरूरी कार्यों का निष्पादन कर सकेगा।