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हरियाणा में कितने इंजन लगेंगे यह तय करेंगे निर्दलीय

  • कांग्रेस का कोई अधिकृत प्रत्याशी नहीं था मैदान में

  • किसी भी पार्टी ने सभी सीटों पर चुनाव नहीं लड़ा

  • जिला परिषद अध्यक्ष की जीत से तय होगी राजनीति

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः हरियाणा में हुए जिला परिषद चुनाव ने सभी राजनीतिक दलों को खुश होने का मौका दे दिया है। ज्यादातर राजनीतिक दल, इस चुनाव को खुद के लिए बढ़त वाला बता रहे हैं। वजह, कई दलों ने 22 जिला परिषदों की सभी 411 सीटों पर पार्टी सिंबल के साथ चुनाव नहीं लड़ा है। कांग्रेस पार्टी, ने एक भी सीट पर सिंबल से चुनाव नहीं लड़ा। बाकी दलों को जहां अपना फायदा दिखा, वहां सिंबल पर उम्मीदवार खड़े कर दिए।

अब ज्यादातर सीटों पर निर्दलीय उम्मीदवार विजयी हुए हैं। इन्हें अपना बताने की होड़ लगी हुई है लेकिन असलियत यही है कि यह निर्दलीय ही अब हरियाणा के स्थानीय निकाय का रुख क्या होगा यह तय करने वाले हैं। भाजपा को उम्मीद है कि यहां भी उसकी जीत होगी और वह राज्य में ट्रिपल इंजन (केंद्र, राज्य और स्थानीय निकाय) से विकास को गति देंगे।

दूसरी ओर, कांग्रेस पार्टी है, जिसके पास अभी तक कोई आधिकारिक विजेता प्रत्याशी नहीं है। कांग्रेस सांसद दीपेंद्र हुड्डा कहते हैं, भाजपा, जजपा, इनेलो, आप व बीएसपी मिलकर भी 13 फीसदी पार्षद ही जिता सकी हैं। जिला परिषद चुनाव में लगभग 87 फीसदी वोट निर्दलीय पार्षदों को मिले हैं। इनमें अधिकांश जिला पार्षद कांग्रेस विचारधारा के हैं। भाजपा ने सात जिलों में ही सिंबल पर चुनाव लड़ा है।

तकरीबन 100 से अधिक सीटों पर भाजपा के आधिकारिक उम्मीदवार मैदान में उतरे थे। 22 सीटों पर जीत हासिल हुई है। आप ने 111 सीटों पर चुनाव लड़ा और 14 सीटों पर जीत दर्ज की है। इनेलो ने जिला परिषद की 72 सीटों पर चुनाव लड़ा था। उसे भी 14 सीटों पर जीत मिली है। इसी तरह जजपा भी दावा कर रही है कि 100 से ज्यादा सीटों पर उसके समर्थित उम्मीदवार जीते हैं। जीत हासिल करने वाले निर्दलीय उम्मीदवारों पर सभी दल अपना दावा कर रहे हैं। भाजपा प्रवक्ता संजय शर्मा कहते हैं, भाजपा समर्थित 150 से ज्यादा उम्मीदवारों ने जीत दर्ज कराई है।

इतना ही नहीं, शर्मा ने 126 निर्दलीय विजयी उम्मीदवार को भी अपना ही बताया है। ऐसे में भाजपा 22 जिला परिषदों के कुल 411 सदस्यों में से 300 विजयी प्रत्याशियों पर अपना दावा कर रही है। चुनाव परिणाम आने के बाद कई दलों ने अपने तरीके से मीडिया में खुद की स्थिति पेश की। जैसे भाजपा ने खुद को पहले नंबर पर बताया। आप नेताओं ने कहा, जिला परिषद चुनाव में वे दूसरे नंबर पर हैं। तीसरे नंबर पर इनेलो आ गई।

कांग्रेस सांसद दीपेंद्र हुड्डा ने स्थिति साफ की। उन्होंने कहा, जिला परिषद चुनाव में लोगों ने भाजपा और जजपा को नकार दिया है। 87 फीसदी लोगों ने निर्दलीय व कांग्रेस विचारधारा के उम्मीदवारों को वोट दिया है। भाजपा को महज पांच फीसदी वोट मिले हैं। इनेलो व आप को तीन फीसदी वोट और बसपा को दो फीसदी वोटों से संतुष्ट करना पड़ा। भाजपा को पूरे प्रदेश में हर सीट पर उनकी पार्टी के सिंबल पर चुनाव लड़ने के लिए उम्मीदवार ही नहीं मिले। दीपेंद्र हुड्डा ने कहा, जिला परिषद में सबसे ज्यादा कांग्रेस समर्थित उम्मीदवार विजयी हुए हैं। भाजपा व जजपा को सत्ता में रहने का कोई अधिकार नहीं है। लोगों ने कांग्रेस समर्थित उम्मीदवारों पर भरोसा जताया है।

अब सारी लड़ाई जिला परिषद के चेयरमैन बनाने की है। जिस किसी पार्टी के पाले में ज्यादा चेयरमैन होंगे, उसका दबदबा रहेगा। आमतौर पर जिस दल की सरकार होती है, चेयरमैन पद के लिए उसका दावा बढ़ जाता है। कुछ लोग यह कह सकते हैं कि गांवों में भाजपा अच्छा प्रदर्शन नहीं कर सकी है।