अब हर ऐसे शिविर में तीन महीने की पूरी तैयारी होगी
छोटे परमाणु जेनरेटर भी वहां होंगे
स्थानीय संसाधनों पर निर्भरता खत्म
कहीं विश्वयुद्ध की पूर्व तैयारी तो नहीं
वाशिंगटन: किसी बड़े युद्ध या भीषण वैश्विक संघर्ष की स्थिति में यदि देश का नागरिक ढांचा (सिविलियन इंफ्रास्ट्रक्चर) पूरी तरह ध्वस्त भी हो जाए, तब भी अमेरिकी सेना पीछे नहीं हटेगी। अमेरिकी रक्षा मंत्रालय (पेंटागन) ने एक बेहद महत्वाकांक्षी और गुप्त योजना पर काम शुरू किया है, जिसके तहत उसके सैन्य ठिकाने बिना किसी बाहरी बिजली, पानी, ईंधन और जरूरी आपूर्ति के लगातार 90 दिनों तक पूरी क्षमता के साथ काम करते रहेंगे। इस विशेष योजना को फोर्ट्रेस नाम दिया गया है।
एक रिपोर्ट के मुताबिक, पेंटागन की मंशा यह सुनिश्चित करना है कि किसी राष्ट्रीय आपातकाल या बहुआयामी युद्ध के दौरान अमेरिका के भीतर स्थित मुख्य सैन्य बेस कम से कम तीन महीने तक पूरी तरह से आत्मनिर्भर होकर काम कर सकें।
पेंटागन के प्रवक्ता सीन पार्नेल ने मीडिया को दिए अपने बयान में स्पष्ट किया कि राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे संवेदनशील मुद्दे के लिए अमेरिकी सेना अब आम नागरिक सेवाओं या नगर निकायों के बुनियादी ढांचे पर निर्भर रहने का जोखिम नहीं उठा सकती। पार्नेल ने कहा, आज के आधुनिक युद्ध में बिजली की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। बिना बिजली के संचार व्यवस्था, जल आपूर्ति, लॉजिस्टिक्स, असेंबली लाइन और बुनियादी सैन्य कमान संरचनाएं पूरी तरह से ठप हो जाती हैं। हम अपनी राष्ट्रीय रक्षा के संचालन के लिए सामान्य नागरिक नगर पालिका के ढांचे पर निर्भर नहीं रह सकते, क्योंकि यह एक असहनीय जोखिम है।
इस योजना के तहत पेंटागन अपने सैन्य ठिकानों पर आपातकालीन बिजली आपूर्ति के लिए पोर्टेबल छोटे परमाणु रिएक्टरों (माइक्रो-रिएक्टर), बड़े पैमाने पर बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणालियों और स्वतंत्र माइक्रोग्रिड्स को स्थापित कर रहा है। ये माइक्रोग्रिड्स मुख्य राष्ट्रीय बिजली ग्रिड के पूरी तरह फेल हो जाने के बावजूद सैन्य ठिकानों को बिजली देते रहेंगे। इसके अलावा, ठिकानों पर अगले 90 दिनों के लिए पानी, ईंधन और संचार साधनों का विशाल बैकअप बनाया जा रहा है।
रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि आपातकाल के समय पेंटागन नागरिक विनिर्माण इकाइयों (कारखानों) को तुरंत रक्षा उत्पादन की दिशा में मोड़ने (डायवर्ट करने) की योजना पर भी काम कर रहा है, जिससे युद्ध के दौरान हथियार और सैन्य उपकरणों की आपूर्ति में कोई बाधा न आए। पार्नेल ने चेताया कि अब अमेरिका यह मानकर नहीं बैठ सकता कि अटलांटिक और प्रशांत महासागर उसे बाहरी खतरों से हमेशा सुरक्षित रखेंगे। उन्होंने कहा, आप किसी वैश्विक बहु-मोर्चे वाले संघर्ष के बीच में इस तरह के फैसले नहीं लेना चाहेंगे, इसके लिए तैयारी पहले से ही पूरी होनी चाहिए।