दो दुश्मन देशों में चुनाव से युद्ध की आशंका
काहिराः अमेरिका और इस्राइल में होने जा रहे आगामी महत्वपूर्ण चुनावों से पहले मध्य पूर्व में तनाव अपने चरम पर पहुँच गया है। दोनों देशों के शीर्ष नेताओं की ओर से आ रही सख्त धमकियों और तेहरान के अड़ियल रुख के बीच आम ईरानी नागरिकों में एक बार फिर पूर्ण युद्ध छिड़ने का खौफ तेजी से घर करने लगा है।
इस्राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की हालिया चेतावनियों के बाद अमेरिका ने क्षेत्र में अपनी सैन्य उपस्थिति और नौसैनिक नाकाबंदी को काफी बढ़ा दिया है। तीसरे विमानवाहक पोत की तैनाती और अतिरिक्त बलों की रवानगी ने स्थिति को और अधिक विस्फोटक बना दिया है।
तेहरान के निवासियों ने क्षेत्र में बढ़ती घबराहट और अनिश्चितता का जिक्र करते हुए बताया कि लोग संभावित बमबारी और हमलों से बचने के लिए जरूरी दवाएं, सूखा राशन और जरूरी सामान जुटा रहे हैं। मार्च और अप्रैल के दौरान हुए भीषण हमलों की खौफनाक यादें अभी भी लोगों के दिलों में ताजा हैं, जिसमें हजारों इमारतें तबाह हो गई थीं।
यही कारण है कि कई परिवार राजधानी तेहरान को छोड़कर देश के सुरक्षित उत्तरी व ग्रामीण इलाकों की ओर पलायन करने की तैयारी में जुट गए हैं।
ईरानी नेतृत्व और राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिकी चुनाव के नतीजों से इतर ट्रम्प प्रशासन नए सैन्य हमले कर सकता है। तेहरान विश्वविद्यालय के पूर्व सरकारी अधिकारी व विशेषज्ञ सासन करीमी के अनुसार, ईरानी प्रशासन हर संभावित परिस्थिति से निपटने और जवाबी कार्रवाई की योजना पर काम कर रहा है।
ईरान ने भी अमेरिकी सैन्य ठिकानों और होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे रणनीतिक समुद्री मार्गों से गुजरने वाले व्यावसायिक जहाजों व डेटा केबलों को निशाना बनाने की धमकी दी है।
इस नौसैनिक नाकाबंदी ने ईरान के तेल निर्यात को पूरी तरह से ठप कर दिया है, जिससे देश की अर्थव्यवस्था पर गहरा संकट मंडरा रहा है। राष्ट्रीय मुद्रा के अवमूल्यन से मुद्रास्फीति रिकॉर्ड स्तर पर पहुँच गई है, जिससे चावल और बीफ जैसे बुनियादी खाद्य पदार्थों के दाम 60% से 150% तक बढ़ गए हैं। आम आदमी की क्रय शक्ति पूरी तरह चरमरा चुकी है और अस्पतालों में जीवनरक्षक दवाओं की भारी किल्लत हो गई है। इसके बावजूद, ईरानी अधिकारियों का कहना है कि आर्थिक दबाव के आगे देश झुकेगा नहीं और अपनी प्रतिरोध की नीति पर ही कायम रहेगा।