साफ्टवेयर की जानकारी देने में किस बात का भय
लोकतंत्र में यह कैसी गोपनीयता
किसे बचाने के लिए नये नये दलील
ईसीआईनेट पर नियंत्रण किसका है
राष्ट्रीय खबर
नईदिल्लीः विशेष गहन संशोधन के दौरान मतदाता सूचियों में त्रुटियों और विसंगतियों की पहचान करने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले सॉफ्टवेयर को लेकर पारदर्शिता के अभाव पर विपक्षी दलों ने गंभीर सवाल उठाए हैं। विपक्ष का आरोप है कि चुनाव आयोग का यह रवैया पूरी चुनावी प्रक्रिया में जनता के भरोसे को कमजोर कर रहा है।
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने रविवार को आरोप लगाया कि चुनाव आयोग द्वारा ईसीआईनेट सॉफ्टवेयर और उससे जुड़ी जानकारियों को साझा करने से इनकार करना बड़े पैमाने पर की गई केंद्रीयकृत हेराफेरी की सच्चाई को उजागर करता है। पार्टी नेता पवन खेड़ा ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता को रोकने का कड़ा आरोप लगाया, वहीं तृणमूल कांग्रेस की नेता और राज्यसभा सांसद मेनका गुरुस्वामी ने जानना चाहा कि चुनाव आयोग आखिर क्या छिपा रहा है।
विपक्ष के इन नेताओं की तीखी प्रतिक्रियाएं एक मीडिया रिपोर्ट के बाद सामने आईं, जिसमें बताया गया था कि चुनाव आयोग ने एक आरटीआई के जवाब में एसआईआर प्रक्रिया के दौरान विसंगतियों का पता लगाने के लिए उपयोग किए गए सॉफ्टवेयर के नाम और उसके संस्करण का खुलासा करने से इनकार कर दिया है। आयोग ने इसके पीछे व्यापारीक गोपनीयता, ट्रेड सीक्रेट और बौद्धिक संपदा का हवाला देते हुए सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत छूट होने की बात कही है।
इस मामले पर चुनाव आयोग और सत्ताधारी दल भाजपा की ओर से पहले ही चुनावी सूचियों के संशोधन में किसी भी तरह की गड़बड़ी से इनकार किया गया है।
जयराम रमेश ने सोशल मीडिया पर तीखा प्रहार करते हुए कहा, भारत का चुनाव आयोग आपदाजनक एसआईआर के केंद्र में मौजूद विवादास्पद ईसीनेट सॉफ्टवेयर के बारे में जानकारी छिपाना जारी रखे हुए है, जिसका उपयोग मतदाता सूचियों में हेराफेरी को केंद्रीयकृत करने के लिए किया गया है।
उन्होंने आरोप लगाया कि तुच्छ बहानों का सहारा लेते हुए ईसीआई ने एसआईआर में इस्तेमाल हो रहे सॉफ्टवेयर का नाम बताने या यह पुष्टि करने से इनकार कर दिया है कि क्या इसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग किया जा रहा है और इसके सुरक्षा उपाय क्या हैं।