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पचास वर्षों में छह किलोमीटर बदला गंगा का बहाव

राज्य के मुख्य सचिव सहित वरीय अधिकारियों का दौरा

भूतनी की स्थिति बहुत ही गंभीर है

हर साल दर्जनों गांव तबाह हो रहे हैं

स्थायी निदान का आश्वासन दिया

राष्ट्रीय खबर

मालदाः राज्य के मुख्य सचिव ने इस दिन मालदा में नदी के कटाव और बाढ़ की स्थिति का निरीक्षण किया। उन्होंने गंगा, फुलहार और कोशी नदियों के प्रवाह मार्ग की जांच की। अतीत में ये नदियां किस मार्ग से बहती थीं और वर्तमान में उनका मार्ग किस प्रकार बदला है, इसका पुनरीक्षण किया गया। उन्होंने इस बात पर भी विशेष ध्यान दिया कि नदियों के मार्ग में आया यह बदलाव भविष्य में कितना खतरनाक साबित हो सकता है। पिछले पचास वर्षों में गंगा के बहाव का रास्ता करीब छह किलोमीटर बदला है।

समस्या के स्थायी समाधान के संदर्भ में मुख्य सचिव ने स्पष्ट किया कि इस स्थिति से निपटना केवल राज्य सरकार के अकेले के वश में नहीं है। इसके लिए झारखंड और बिहार को भी साथ लेकर आगे बढ़ना होगा। उनके शब्दों में, सबसे महत्वपूर्ण बात यह मार्ग खोजना है कि समस्या का समाधान कैसे किया जा सकता है; धन का विषय इसके बाद के चरण में विचाराधीन होगा।

मुख्यमंत्री के निर्देश पर जमीनी स्थिति का निरीक्षण करने के बाद, अब राज्य सरकार मालदा के भूतनी क्षेत्र की समस्या के समाधान के लिए एक स्थायी योजना तैयार करने की पहल कर रही है। मुख्य सचिव ने बताया कि इस उद्देश्य से मालदा में एक उच्च स्तरीय बैठक आयोजित की जाएगी। इस बैठक में कानपुर आईआईटी के विशेषज्ञ वर्चुअल माध्यम से जुड़ेंगे। इसके साथ ही, भूतनी की समस्या का स्थायी उपाय खोजने के लिए राज्य सरकार इंडियन रिवर इंस्टीट्यूट के विशेषज्ञों से भी परामर्श ले रही है।

नदियों के मार्ग परिवर्तन के कारण मालदा के बड़े हिस्से में भविष्य में किस प्रकार की आपदा आ सकती है, इसे लेकर चिंताएं बढ़ रही हैं। गंगा और फुलहार का लगातार एक-दूसरे के करीब आना स्थिति को और भी जटिल बना रहा है। इसलिए किसी बड़ी तबाही को टालने के लिए नदियों के प्रवाह मार्ग का विश्लेषण करके शीघ्र प्रभावी और दीर्घकालिक योजना बनाना ही राज्य सरकार के सामने मुख्य चुनौती है।