कैम्ब्रिज के वैज्ञानिकों ने विकसित की दस डॉलरकी चिप
नया ऑप्टिकल स्पेक्ट्रोमीटर विकसित
पुरानी तकनीकों से यह बहुत बेहतर है
खून की गतिविधियों को सही नापता है
राष्ट्रीय खबर
रांचीः महज 10 डॉलर की लागत वाला एक नया ऑप्टिकल सेंसर वेअरेबल हेल्थ मॉनिटर में प्रयोगशाला स्तर की सटीकता ला सकता है। इससे लोग बिना सुई चुभाए ब्लड ग्लूकोज को ट्रैक कर सकेंगे। यह तकनीक खाद्य परीक्षण, औद्योगिक गुणवत्ता नियंत्रण और पर्यावरण निगरानी की दिशा में बड़ा बदलाव ला सकती है।
कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय और इसी शोध समूह द्वारा स्थापित स्टार्टअप ग्लीटरिनटेक के शोधकर्ताओं ने एक नया ऑप्टिकल स्पेक्ट्रोमीटर विकसित किया है, जो असाधारण सटीकता, बेहद छोटे आकार और कम लागत का एक अनूठा संगम है। आकार में महज कुछ सेंटीमीटर का यह उपकरण पोर्टेबल इलेक्ट्रॉनिक्स और वेअरेबल स्वास्थ्य तकनीकों में फिट हो सकता है।
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ऑप्टिकल स्पेक्ट्रोमीटर प्रकाश का विश्लेषण करके पदार्थों की जानकारी देते हैं। यह चिकित्सा, निर्माण और पर्यावरण अनुसंधान में महत्वपूर्ण उपकरण हैं। हालांकि, इन्हें छोटा करने से अक्सर इनकी सटीकता और रिजॉल्यूशन कम हो जाता है। शोधकर्ताओं का मानना है कि उनका नया कन्वोल्यूशन स्पेक्ट्रोमीटर इस सीमा को पार करता है। यह तकनीक प्रकाश का विश्लेषण करने के लिए कन्वोल्यूशन थ्योरम नामक गणितीय सिद्धांत का उपयोग करती है, जो पारंपरिक डिजाइनों की तुलना में बेहतर प्रदर्शन देती है।
अध्ययन के प्रमुख लेखक डॉ. चुनहुई याओ ने बताया कि ऑप्टिकल क्षेत्र में सीधे कन्वोल्यूशन थ्योरम का उपयोग करके हमने मिनी-स्पेक्ट्रोमीटर की कई सीमाओं को दूर किया है। यह उपकरण सिलिकॉन नाइट्राइड फोटोनिक प्लेटफॉर्म पर बना है और 1200 से 1700 नैनोमीटर की तरंगदैर्ध्य (तरंगों) पर काम करता है। यह एक सेकंड से भी कम समय में आंकड़े संसाधित कर सकता है।
प्रयोगशाला के परीक्षणों में इस स्पेक्ट्रोमीटर ने प्लास्टिक, दवाओं, कॉफी, आटे और चाय की पहचान करने में 100 फीसद सफलता दर हासिल की। स्वास्थ्य से जुड़े परीक्षणों में इसने त्वचा की नमी, रक्त में अल्कोहल, लैक्टेट और ब्लड ग्लूकोज का सटीक माप लिया। एक प्रतिभागी पर बिना त्वचा में सुई चुभाए लंबे समय तक ग्लूकोज ट्रैकिंग का सफल प्रदर्शन भी किया गया।
परियोजना का नेतृत्व करने वाले प्रो. किशियांग चेंग के अनुसार, यह उपकरण न केवल प्रयोगशाला में सटीक है, बल्कि व्यावहारिक रूप से उपयोग के लिए भी तैयार है। यह सेंसर -20 डिग्री से 80 डिग्री से के अत्यधिक तापमान में भी बिना प्रभावित हुए काम करता है। इसके अलावा, पारंपरिक स्पेक्ट्रोमीटर की तुलना में इसमें कम कंप्यूटिंग पावर और जटिल एल्गोरिदम की आवश्यकता होती है। शोधकर्ताओं का लक्ष्य स्पेक्ट्रोमेट्री को तापमान या मोशन सेंसिंग की तरह आम बनाना है, जिससे स्वास्थ्य, उद्योग और खाद्य सुरक्षा में क्रांतिकारी बदलाव आ सके।
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