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वेनेजुएला में निष्पक्ष चुनाव की मांग तेज

मादुरो को पकड़कर अमेरिका ले जाने के बाद दूसरी चुनौती खड़ी

काराकासः वेनेजुएला में पिछले लगभग दो वर्षों से चले आ रहे गंभीर राजनीतिक गतिरोध और अनिश्चितता को चीरते हुए आखिरकार देश का मुख्य विपक्ष सड़कों पर उतर आया है। देश भर के विभिन्न प्रमुख शहरों में हजारों की संख्या में आम नागरिक और विपक्षी समर्थक एकत्र हुए और देश में तत्काल निष्पक्ष राष्ट्रपति चुनाव कराने की पुरजोर मांग उठाई। राजनीतिक घटनाक्रम के लिहाज से यह पिछले दो वर्षों में हुआ पहला सबसे बड़ा राष्ट्रव्यापी विरोध प्रदर्शन है, जिसने अंतरिम सरकार और अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया है।
गौरतलब है कि जनवरी 2026 में अमेरिकी सेना द्वारा चलाए गए एक गुप्त और बेहद सनसनीखेज सैन्य अभियान के दौरान तत्कालीन राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को गिरफ्तार कर देश से बाहर ले जाया गया था। तब से लेकर अब तक देश की सत्ता की बागडोर अंतरिम राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिग्ज के हाथों में है। हालाँकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और अंतरिम नेता डेल्सी रोड्रिग्ज दोनों ही सार्वजनिक रूप से भविष्य में लोकतांत्रिक चुनाव कराने की बात स्वीकार कर चुके हैं, लेकिन हकीकत यह है कि अभी तक आगामी चुनावों की किसी भी निश्चित तारीख या समय-सारणी की आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है, जिससे जनता और विपक्ष में गहरा असंतोष व्याप्त है।
इस राष्ट्रव्यापी विरोध प्रदर्शन का आह्वान नोबेल शांति पुरस्कार विजेता और देश की प्रमुख विपक्षी नेता मारिया कोरिना माचाडो के राजनीतिक आंदोलन वेंते वेनेजुएला द्वारा किया गया था। सुरक्षा कारणों और धमकियों के चलते पिछले लगभग एक साल से देश से बाहर और भूमिगत जीवन बिता रही माचाडो ने स्पष्ट और दो टूक मांग की है कि वेनेजुएला में आगामी जुलाई 2027 तक हर हाल में पारदर्शी और निष्पक्ष राष्ट्रपति चुनाव संपन्न कराए जाएं। उनके इस आह्वान पर राजधानी काराकास के साथ-साथ औद्योगिक व व्यावसायिक रूप से महत्वपूर्ण शहरों जैसे वेलेंसिया, माराकाय, सैन क्रिस्टोबल और माराकाइबो की सड़कों पर भारी जनसैलाब उमड़ पड़ा।
ऐतिहासिक रूप से देखा जाए तो वर्ष 1999 से सत्ता पर काबिज यूनाइटेड सोशलिस्ट पार्टी ऑफ वेनेजुएला की सरकारों ने अतीत में ऐसे किसी भी जन-आंदोलन या विरोध प्रदर्शन को कुचलने के लिए क्रूर सैन्य बल और कठोर दमनकारी नीतियों का खुलकर इस्तेमाल किया है। लेकिन इस बार के प्रदर्शनों की एक खास और हैरान करने वाली बात यह रही कि अधिकांश प्रदर्शन स्थलों पर सरकारी सुरक्षा बलों और पुलिस की मौजूदगी बेहद नगण्य और न्यूनतम देखी गई, जिससे प्रदर्शनकारियों ने बिना किसी बड़े अवरोध के अपनी आवाज बुलंद की।
वर्तमान में अमेरिका समर्थित राजनीतिक वार्ताओं का दौर भी गुप्त रूप से चल रहा है। इन वार्ताओं के तहत अंतरिम सरकार और विपक्ष के एक नरमपंथी गुट के बीच देश की सर्वोच्च न्यायपालिका और राष्ट्रीय चुनावी परिषद के व्यापक पुनर्गठन को लेकर चर्चाएं जारी हैं। हालांकि, यह भी एक सच्चाई है कि व्यापक जनसमर्थन रखने वाले मारिया कोरिना माचाडो के मुख्य विद्रोधी धड़े को इन आधिकारिक वार्ताओं से सीधे तौर पर बाहर रखा गया है। दूसरी ओर, व्हाइट हाउस के रणनीतिक समर्थन के सहारे टिके होने के बावजूद डेल्सी रोड्रिग्ज की अंतरिम सरकार पर अमेरिकी प्रशासन का कड़ा कूटनीतिक और आर्थिक दबाव लगातार बना हुआ है। देश के विशाल तेल संसाधनों पर नियंत्रण को लेकर जारी कशमकश, मानवाधिकारों के गंभीर हनन के आरोपों और चरमराती अर्थव्यवस्था के बीच वेनेजुएला के आम नागरिक अब पुरानी समाजवादी तानाशाही से मुक्ति पाकर एक नए राजनीतिक नेतृत्व और ठोस आर्थिक सुधारों की उम्मीद के साथ टकटकी लगाए बैठे हैं।