प्यार कोई ऐसा वैसा नहीं है भइया, वह एक विज्ञापन आता था ना, फेविकोल का बेजोड़ जोड़। ठीक वइसा वाला ही है। चाहे कुछ कर लोग एक दूसरे से अलग नहीं होंगे। अलग हो भी नहीं सकते क्योंकि अलग हुए तो सारा कचड़ा बाहर आ जाएगा। नीचे वाले दो चार बकरे अगर हलाल हो जाते हैं तो हो जाने दो। अपनी कुर्सी बची रहे तो नये बकरे भी आ जाएंगे। कंफ्यूज मत होइये। मैं अमित शाह और ज्ञानेश कुमार की बात कर रहा हूं। पहले तो ज्ञानेश कुमार की सुरक्षा बढ़ा दी गयी। अब पूरी दिल्ली के छावनी बना दिया गया है ताकि कोई प्रदर्शन भी ना हो पाए। लेकिन क्या इससे काम चल पाएगा।
अजी काम जाए भाड़ में। कुर्सी रही तो सब कुछ सही रहेगा और अगर नहीं रही तो जितनो को जेल भेजा था, सभी अपना अपना दांव लगाकर इन्हें भी जेल भेज देंगे। एक बार लाल घर गये तो कितने दिनों बाद निकलेंगे, इसका कोई ठिकाना नहीं है। लिहाजा हर किस्म का दांव को खेलना पड़ेगा। वइसे भी कहा गया है कि प्यार और राजनीति में सब जायज है। इसलिए नीति और आदर्श की बात यहां नहीं की जा सकती।
दरअसल परेशानी इस बात की है कि अपने गुट में कोई तो भेदिया है जो राज बाहर पहुंचा रहा है। वरना मीडिया वालों को कइसे पता चला कि तीनों चुनाव आयुक्तों के बीच गंभीर मतभेद है। एक राज खुला तो हर रोज नये नये खुलासे हो रहे हैं। फॉर्म 6 पर जो दावा किया था, उसे भी सुप्रीम कोर्ट ने झूठला दिया। सब समय का फेर है नहीं तो किसमें इतनी हिम्मत थी कि आदेश ना माने। इसलिए चारों खाने चौकस रहना है और यह पता लगाना है कि आखिर ऑपोजिशन का भेदिया कौन है, जो घर के अंदर की जानकारी बाहर पहुंचा रहा है। आपस के प्यार की बात में यह मिट्टी तेल कौन डाल रहा है।
इसी बात पर वर्ष 1963 में बनी फिल्म दिल एक मंदिर का यह प्रसिद्ध गीत याद आ रहा है। इस गीत को लिखा था हसरत जयपुरी ने और संगीत में ढाला था शंकर जयकिशन ने। इसे लता मंगेशकर ने अपना स्वर प्रदान किया था। गीत के बोल कुछ इस तरह हैं।
हम तेरे प्यार में सारा आलम खो बैठे हैं
तुम कहते हो कि ऐसे प्यार को भूल जाओ, भूल जाओ
हम तेरे प्यार में सारा आलम …
पंछी से छुड़ाकर उसका घर, तुम अपने घर पर ले आये
ये प्यार का पिंजरा मन भाया, हम जी भर भर कर मुस्काये
जब प्यार हुआ इस पिंजरे से, तुम कहने लगे आज़ाद रहो
हम कैसे भुलायें प्यार तेरा, तुम अपनी ज़ुबाँ से ये न कहो
अब तुमसा जहां में कोई नहीं हैं, हम तो तुम्हारे हो बैठे
तुम कहते हो कि ऐसे प्यार को भूल जाओ, भूल जाओ …
इस तेरे चरण की धूल से हमने अपनी जीवन माँग भरी
जब ही तो सुहागन कहलायी, दुनिया के नज़र में प्यार बनी
तुम प्यार की सुन्दर मूरत हो, और प्यार हमारी पूजा है
अब इन चरणों में दम निकले, बस इतनी और तमन्ना है
हम प्यार के गंगा जल से बलम जी तन मन अपना धो बैठे
तुम कहते हो कि ऐसे प्यार को भूल जाओ, भूल जाओ …
सपनों का दर्पण देखा था, सपनों का दर्पण तोड़ दिया
ये प्यार का आँचल हमने तो, दामन से तुम्हारे बाँध लिया
ये ऐसी गाँठ हैं उल्फ़त की, जिसको ना कोई भी खोल सका
तुम आन बसे जब इस दिल में, दिल फिर तो कहीं ना डोल सका
ओ प्यार के सागर हम तेरी लहरों में नाव डुबो बैठे
तुम कहते हो कि ऐसे प्यार को भूल जाओ, भूल जाओ …
भाई इतना कुछ पापड़ बेलकर यहां पहुंचे हैं और यहां से सीधे जेल पहुंच गये तो क्या होगा। दिक्कत है कि अब मीडिया का असर भी लगता है खत्म हो गया है। हमारे कहने पर वे स्टोरी प्लांट तो कर देते हैं पर जनता ने उनके बदले अब सोशल मीडिया पर अधिक भरोसा जताया है। ऊपर से यह तेलचट्टे। इनकी वजह से सारा बना बनाया प्लान ही चौपट होने को आ गया है।
विधायक या एमपी होते तो ले देकर मामला सेटल कर लेते। यह कमीने तो जेल से निकलते ही फिर से धमकी देने लगे। पता नहीं उस तरफ भी कौन किसके प्यार में सारा आलम खो बैठा है। वरना इतने लाठी चार्ज के बाद बार बार भीड़ के जुटने से परेशानी तो दिनोंदिन बढ़ती ही जा रही है। गनीमत है कि सुप्रीम कोर्ट अब तक डरा हुआ है वरना वहां से कोई आदेश आ जाता तो परेशानी और बढ़ जाती। दिमाग लगाओ, जासूसों को सक्रिय करो ताकि पता चल सके कि हमारे बीच विभीषण कौन है।