कांग्रेस ने कहा आरएसएस के भीतर ही चल रहा सत्ता संघर्ष
नईदिल्लीः राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने अपने आगामी वार्षिक विजयदशमी उत्सव के लिए देश के पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ को एक विशिष्ट अतिथि के रूप में आमंत्रित किया है। नागपुर में आयोजित होने वाले इस बेहद महत्वपूर्ण और प्रतिष्ठित कार्यक्रम में संघ प्रमुख मोहन भागवत मुख्य रूप से स्वयंसेवकों और देशवासियों को संबोधित करेंगे।
इस वर्ष का विजयदशमी उत्सव संघ के लिए बेहद ऐतिहासिक है, क्योंकि इसके साथ ही आरएसएस अपने साल भर चलने वाले शताब्दी समारोह का समापन कर रहा है। इस भव्य कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में दैनिक जागरण समूह के संपादक संजय गुप्ता को आमंत्रित किया गया है, जबकि संघ के सूत्रों के अनुसार जगदीप धनखड़ उन कई गणमान्य अतिथियों की सूची में शामिल हैं जिन्हें इस विशेष अवसर पर उपस्थित रहने के लिए आमंत्रित किया गया है।
पूर्व उपराष्ट्रपति को मिले इस आमंत्रण के बाद राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने इस मुद्दे को लेकर भाजपा और संघ परिवार पर कड़ा राजनीतिक हमला बोला है। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के संचार विभाग के महासचिव जयराम रमेश ने सोशल मीडिया के माध्यम से तंज कसते हुए दावा किया कि ‘संघ परिवार’ के भीतर सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है और यह आंतरिक कलह का संकेत है।
जयराम रमेश ने याद दिलाया कि किस प्रकार जुलाई 2025 में प्रधानमंत्री और गृहमंत्री ने मिलकर मात्र कुछ ही मिनटों के भीतर तत्कालीन उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ को उनके पद से इस्तीफा देने के लिए विवश कर दिया था, जिन्हें खुद सत्ता पक्ष ने तीन साल पहले इस पद पर निर्वाचित किया था। कांग्रेस नेता के अनुसार, धनखड़ किसानों की मांगों की लगातार हो रही उपेक्षा के मुखर आलोचक रहे थे। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सत्ता शीर्ष की संकीर्ण सोच के कारण पूर्व उपराष्ट्रपति को आज तक वह सरकारी आवास आवंटित नहीं किया गया है, जिसके वे नियमानुसार हकदार हैं।
आरएसएस का वार्षिक विजयदशमी उत्सव हमेशा से एक अत्यंत महत्वपूर्ण और राजनीतिक रूप से पैनी नजरों से देखा जाने वाला समारोह रहा है, क्योंकि इस मंच से संघ प्रमुख मोहन भागवत संगठन के विशाल कैडर को भविष्य की दिशा और वैचारिक नीति का संदेश देते हैं।
उल्लेखनीय है कि जुलाई 2025 में स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए अपने पद से इस्तीफा देने वाले जगदीप धनखड़ ने तब से सार्वजनिक जीवन में काफी कम सक्रियता दिखाई है और वे बेहद कम नजर आए हैं। बहरहाल, शताब्दी वर्ष के इस बड़े आयोजन में आरएसएस द्वारा उन्हें विशेष अतिथि के रूप में बुलाए जाने को लेकर राजनीतिक विश्लेषक नए मायने निकाल रहे हैं, और कांग्रेस का यह दावा कि संघ का वैचारिक तंत्र खुद अपने अंदर ही संघर्षरत है इस घटना को और अधिक चर्चा में ले आया है।