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राष्ट्रपति ने छह नए राज्यपाल किए नियुक्त

पलामू के पूर्व सांसद की भी इसमें लॉटरी खुल गयी

नईदिल्लीः राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने हाल ही में देश के प्रशासनिक ढांचे और संवैधानिक व्यवस्था को और अधिक गतिशीलता प्रदान करने के उद्देश्य से छह प्रमुख राज्यों में नए राज्यपालों की नियुक्ति की घोषणा की है। राष्ट्रपति भवन द्वारा जारी आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार, यह सभी नियुक्तियां संबंधित राज्यपालों द्वारा अपने पद की शपथ ग्रहण करने और आधिकारिक कार्यभार संभालने की तिथि से प्रभावी मानी जाएंगी। इस फेरबदल के तहत कुछ अनुभवी राज्यपालों को नई जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं, वहीं कुछ नए चेहरों को राज्यों के संवैधानिक प्रमुख के रूप में महत्वपूर्ण कमान दी गई है।

इस प्रशासनिक फेरबदल की मुख्य कड़ी के रूप में, सिक्किम के वर्तमान राज्यपाल ओम प्रकाश को स्थानांतरित कर केरल का नया राज्यपाल नियुक्त किया गया है। केरल की कमान संभाल रहे मौजूदा राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर को अब तमिलनाडु के राज्यपाल की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई है। इन दोनों अनुभवी नेताओं के अनुभव का लाभ अब दक्षिण भारत के इन दोनों महत्वपूर्ण राज्यों को मिलेगा, जहां प्रशासनिक और राजनीतिक दृष्टि से राज्यपाल की भूमिका बेहद अहम मानी जाती है।

इसके साथ ही, भारतीय राजनीति और संगठन में सक्रिय रूप से कार्य कर चुके चेहरों को भी राज्यों के संवैधानिक प्रमुख के रूप में बड़ा दायित्व दिया गया है। ब्रज मोहन राम को ओडिशा का नया राज्यपाल बनाया गया है, जो राज्य के विकास और संवैधानिक दायित्वों का निर्वहन करेंगे। वह झारखंड के पलामू संसदीय सीट से भाजपा के सांसद रहे हैं। वहीं, जानी-मानी नेत्री और राजनीतिक क्षेत्र में मजबूत पकड़ रखने वाली डॉ. सुधा यादव को कर्नाटक राज्य की कमान सौंपी गई है। कर्नाटक जैसे प्रगतिशील और औद्योगिक रूप से अग्रणी राज्य में उनका यह नया कार्यकाल विशेष महत्व रखता है।

उत्तराखंड और सिक्किम जैसे सीमावर्ती एवं रणनीतिक रूप से संवेदनशील राज्यों में भी नए नेतृत्व की घोषणा की गई है। डॉ. ढल सिंह बिसेन को उत्तराखंड का नया राज्यपाल नियुक्त किया गया है, जो देवभूमि के विकास में अपना योगदान देंगे। इसके अलावा, भाजपा के वरिष्ठ नेता दुष्यंत गौतम को सिक्किम के राज्यपाल की जिम्मेदारी दी गई है, जो पूर्वोत्तर के इस खूबसूरत राज्य की बागडोर संभालेंगे।

संविधान के अनुच्छेद 155 के तहत की गई इन नियुक्तियों का मुख्य उद्देश्य राज्यों में संवैधानिक प्रक्रियाओं को सुचारू रूप से चलाना और केंद्र तथा राज्य के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना है। इन सभी नव-नियुक्त राज्यपालों के अपने-अपने कार्यभार संभालने के बाद संबंधित राज्यों में प्रशासनिक गतिविधियों को एक नई दिशा मिलने की पूरी उम्मीद है।