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दिल्ली में बाहर से तेइस हजार सुरक्षा बल लाये गये

सीजेपी के आंदोलन को कमतर नहीं आंक रही सरकार

पहले से ही कई कंपनियां तैनात है

दिल्ली पुलिस के अपने जवान भी हैं

कई राज्यों से इन्हें बुलाया गया है

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः  राष्ट्रीय राजधानी में किसी विरोध प्रदर्शन के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए केंद्रीय बलों की अब तक की सबसे बड़ी तैनाती की जा रही है। गृह मंत्रालय ने 8 से 12 अक्टूबर तक दिल्ली पुलिस के लिए केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों की कुल 221 कंपनियों—यानी लगभग 23,000 कर्मियों—की व्यवस्था की है। इनमें जुलाई में कॉकरोच जनता पार्टी के विरोध प्रदर्शनों के मद्देनजर उपलब्ध कराई गई 111 कंपनियां और 6 अक्टूबर को स्वीकृत 110 कंपनियां शामिल हैं।

इस तैनाती के लिए केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल की कंपनियों को जम्मू-कश्मीर के जम्मू क्षेत्र (जहां उन्हें अमरनाथ यात्रा के बाद रखा गया था), पश्चिम बंगाल (जहां वे पिछले साल के चुनावों से तैनात हैं), और छत्तीसगढ़ (जहां वे विशेष रूप से नक्सल विरोधी अभियानों में लगे हैं) से वापस बुलाया जा रहा है। यह तैनाती जुलाई के सीएपीएफ आंदोलन और 2020-21 के किसान आंदोलनों जैसे पिछले दो बड़े प्रदर्शनों की तुलना में काफी बड़ी है।

यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब सीजेपी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेंद्र कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर 10 अक्टूबर से जंतर-मंतर 2.0 के रूप में एक नए आंदोलन की घोषणा की है। यह विरोध मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) से जुड़े मुद्दों को लेकर किया जा रहा है।

सुरक्षा तंत्र के एक सूत्र ने बताया, दिल्ली में चल रहे विरोध प्रदर्शनों के बीच कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए इन कंपनियों को लाया जा रहा है ताकि कोई अप्रिय घटना न हो। सुरक्षा बलों के अलावा कम से कम 15,000 दिल्ली पुलिस के जवान भी मैदान में तैनात रहेंगे। इस लामबंदी का पैमाना जी-20 शिखर सम्मेलन के दौरान की गई तैनाती के लगभग बराबर है, जब 236 सीएपीएफ कंपनियों के साथ लगभग 25,000 दिल्ली पुलिसकर्मी तैनात किए गए थे।