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अब भारत अपने जीपीएस की तैयारी में

कारगिल युद्ध और ऑपरेशन सिंदूर में धोखा मिला था

नाविक योजना के तहत उपग्रह गया

एनवीएस -03 का प्रक्षेपण सफल रहा

इसमें नई पीढ़ी की तकनीक शामिल

राष्ट्रीय खबर

हैदराबादः भारत की अपनी नेविगेशन प्रणाली नाविक को अधिक सटीक और मजबूत बनाने के लिए भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन ने आंध्र प्रदेश के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से जीएसएलवी रॉकेट के जरिए अत्याधुनिक उपग्रह एनवीएस -03 का सफल प्रक्षेपण किया। इस सफलता पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वैज्ञानिकों को बधाई देते हुए कहा कि यह मिशन भारत की अपनी सैटेलाइट नेविगेशन प्रणाली को मजबूत करेगा और विभिन्न तकनीकों में देश को आत्मनिर्भर बनाने में मदद करेगा।

फिलहाल नेविगेशन और सटीक लोकेशन के लिए भारत को काफी हद तक अमेरिकी जीपीएस  तकनीक पर निर्भर रहना पड़ता है। हालांकि, एनवीएस -03 उपग्रह में स्वदेशी रूप से विकसित रुबीडियम परमाणु घड़ी लगाई गई है, जो सीधे एल1, एल5 और S बैंड में सिग्नल भेजने में सक्षम है। एल1 बैंड सामान्य स्मार्टफोन और स्मार्टवॉच के साथ सीधे संगत है, जिससे आम जनता को गूगल मैप्स या लोकेशन ट्रैक करने में बेहद सटीक जानकारी मिलेगी। इसके अलावा, भारत को अमेरिका पर निर्भरता कम करने के लिए देश के पांच शहरों—गुवाहाटी, भुवनेश्वर, बेंगलुरु, अहमदाबाद और फरीदाबाद में सेकेंडरी टाइम-स्केल स्थापित कर अपनी समय-गणना प्रणाली को भी बेहतर बना रहा है। 2250 किग्रा वजनी एनवीएस-03 उपग्रह इसरो की अगली पीढ़ी की नेविगेशन श्रृंखला का तीसरा प्रक्षेपण है।